विचार के बाद आकार में बदलता आनंद विभाग

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान का मानना है कि राज्य का पूर्ण विकास नागरिकों की मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक उन्नति और प्रसन्नता से ही संभव है। अत: नागरिकों को ऐसी विधियाँ और उपकरण उपलब्ध करवाने होंगे, जो उनके लिए आनंद का कारक बनें। विकास का मापदण्ड मूल्य आधारित होने के साथ नागरिकों के आनंद की पहचान करने वाला भी होना चाहिए। अपनी इस अवधारणा को साकार करने के लिए भौतिक प्रगति के पैमाने से आगे बढ़कर मुख्यमंत्री ने 6 अगस्त 2016 को आनंद विभाग का गठन किया। यह विभाग बनाने वाला मध्यप्रदेश देश में पहला राज्य है।

आनंदक

सवाल यह था कि विभाग कैसे और क्या करे कि नागरिकों के जीवन में आनंद का समावेश हो। बहुतों को तो यह विचार ही अजब-गजब लगा कि आनंद और सरकार का क्या मेल ! आज जब मुख्यमंत्री के विचार ने आकार लेना शुरू कर दिया है तो यह जाहिर है कि असंभव कुछ नहीं है। इच्छाशक्ति होनी चाहिये सद्विचार को मूर्तरूप देने की। आनंदक अपने अन्य सामान्य कार्यकलापों के अलावा राज्य आनंद संस्थान की गतिविधियों में शामिल होने के लिये स्व-प्रेरणा से तैयार स्वयंसवेक है। ये लोग समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर प्रशिक्षण लेते हैं और उसके अनुरूप कार्य करते हैं। आनंदक का काम यह है कि वे अपने कृतित्व तथा विचारों से दूसरों के लिए सकारात्मक उदाहरण बने और अन्य व्यक्तियों को भी आंनद की गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। यदि कोई शासकीय सेवक स्वयं को आनंदक के रूप में पंजीकृत कराता है तो उसकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उपस्थिति शासकीय कार्य के अंतर्गत मानी जाती है। स्वयंसेवी लोगों को 'आनंदक' के रूप में राज्य आनंद संस्थान की वेबसाइट www.anandsansthanmp.in पर पंजीयन कराने की सुविधा है। अब तक 44 हजार से अधिक स्वयंसेवक स्वेच्छा से आनंदक बने हैं।

अल्प विराम

अल्प विराम गतिविधि से शासकीय विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के जीवन में सकारात्मक सोच का विकास किया जा रहा है। कहा जाता है कि आनंद की अनुभूति का हम पीछा नहीं कर सकते, आनंद तो स्वत: हमारे हृदय में ही रहता है। इस गतिविधि का रोमांच इस खोज में ही है कि अपने आपको आनन्द की कसौटी पर कसकर देखा जाये। अपने प्रत्येक कर्म को आनन्दपूर्ण बनाया जाये। शासकीय अधिकारियों/ कर्मचारियों को इसका अनुभव कराते हुए इस मार्ग पर सतत रूप से चलने के लिए उन्हें प्रेरित करने हेतु इस गतिविधि की शुरूआत की गई है। अब तक इस गतिविधि में 166 तक इस गतिविधि में 166 आनंदम सहयोगियों को प्रशिचित किया जाकर 780 अल्पविराम कार्यक्रम किये जा चुके हैं।

आनन्दम्

'आनंदम' गतिविधि में उपयुक्त सार्वजनिक स्थलों पर एक स्थल चुनकर, न्यूनतम सुविधा के उपयोग के सामान को छोड़ने तथा उस सामान की जिसे जरूरत हो, वहाँ से नि:शुल्क तथा बिना किसी से पूछे ले जाने की, स्वतंत्रता होती है। सभी 51 जिलों में 172 निर्धारित स्थान पर यह गतिविधि संचालित हो रही है।

आनंद उत्सव

इसमें शासकीय तथा अशासकीय संस्थाओं के जरिये ऐसी गतिविधियों का संचालन किया जाता है जो प्रदेशवासियों को परिपूर्ण जीवन की कला सिखा सकेंगी, जिससे उनके जीवन में आनंद की अनुभूति हो सके। पिछले साल 14 से 21 जनवरी को प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 7600 स्थान पर आनंद उत्सव मनाये गये। इस वर्ष भी 14 से 28 जनवरी के बीच ग्रामीण/नगरीय क्षेत्रों में आनंद उत्सव आयोजित हुए हैं।