भोपाल कोआपरेटिव बैंक घोटाला, ब्याज की आड़ में कमीशन का खेल

भोपाल कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक घोटाला दागी अभी भी पद पर आसीन, सरकार को रिपोर्ट का इंतज़ार, मामला लोकायुक्त में भी पहुंचा, आनन-फ़ानन में सरकार ने किरकिरी से बचने के लिए आगे आकर लिखी जांच और किया खुलासा....

भोपाल केसरिया खबर केसरिया नज़र 15 अप्रैल 2019

इन दिनों राजधानी भोपाल और पूरे मप्र में भोपाल कोऑपरेटिव सेंट्रल (केंद्रीय) बैंक के 118 करोड़ का घोटाला चर्चा में है , दरअसल सूत्रों के मुताबिक बैंक के अधिकारियों ने ज्यादा ब्याज और कमीशन (दलाली) के लालच में ऐसी कंपनी में जमाकर्ताओं का पैसा लगा दिया जो बंद होने की कगार पर पहुंच गई है।

जानकारी के मुताबिक बैंक ने आईएलएंडएफएस समूह मुंबई की दो कंपनियों (आईटीएनएल और आईईटीएस) में अक्टूबर 2017 में 110 करोड़ रुपए साढ़े नौ प्रतिशत ब्याज दर मिलने के कारण सावधि जमा बतौर निवेश किए थे।

अक्टूबर 2018 में एक साल पूूरा हो गया और ब्याज सहित *राशि 118 करोड़ रुपए हो गई।* कंपनी यह राशि देने की स्थिति में नहीं थी। इस पर कानूनी कार्रवाई करने की जगह एक साल के लिए फिर से 118 करोड़ रुपए की एफडी उसी कंपनी में कर दी गयी। एक कंपनी दिवालिया हो चुकी है और दूसरी के पास सिर्फ इतना ही पैसा है कि वो कुछ देनदारी चुका सकती है। इसके बावजूद कंपनी के खिलाफ कोई कानूनी कदम न उठाते हुए मामले को दबाने की कोशिश की गई। मप्र सरकार के सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह की जानकारी में मामला आते ही उन्होंने पहले प्रमुख सचिव अजीत केसरी को जांच करने के आदेश दिए। इस पर जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो उन्होंने गुरुवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती को लिखकर पूरा मामला बता दिया।

केसरिया पड़ताल ,घोटाले के संभावित मुख्य किरदार!

1- एम एल गजभिये तत्कालीन उपायुक्त सहकारिता ( न्यायिक भोपाल) जिस समय अक्टूबर 2017 में एफडी हुई एवं 2018 में रिन्यूअल हुआ एवं जमा किये गए पैसे (एफडी के तौर पर) जो अब डूबत में हैं, तब गजभिये उपायुक्त भोपाल एवं प्रशासक भोपाल कोऑपरेटिव भी रहे हैं।

इन पर अब तक क्या कार्यवाही हुई ?

एवं इनकी भूमिका की जांच अब तक क्यों नही हुई?

बड़ा प्रश्न

इन्हें बैंक के संचालक मंडल को भंग करने के उपरांत प्रशासक बनाया गया था 2019 में, एवं त्रुटि पूर्ण, विधि विरुद्ध ,आधी-अधूरी कार्यवाही कर आनन फ़ानन में बोर्ड को भंग करने का श्रेय (आरोप) भी इन्ही को जाता है। जिसके चलते ये मामला हाई कोर्ट में है।

2- आर एस विश्वकर्मा प्रबंध संचालक भोपाल कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक.. ये अभी भी एमडी हैं, इनको तत्काल ससपेंड कर अब तक एफआईआर क्यों नही की जा रही?

क्या दस्तावेज खुर्द-बुर्द/कांट छांट या गायब करने की कोई कोशिश की जा रही है बैंक में!

जिस के सतत प्रयास भी जारी हैं। और महाशय कोई संजीवनी बूटी की भी तलाश में भी हैं ।

बकौल विश्वस्त केसरिया सूत्र

जानकारी अनुसार 118 करोड़ के साथ-साथ और भी अन्य मदों से बैंक की राशि लगभग 200 करोड़ अन्य छोटे एवं नये बैंकों में जमा कर कमीशन का बड़ा खेल किया गया है।

जिस से हज़ारों-लाखों खाता धारकों एवं वो पेंशन भोगी जिनकी मेहनत की कमाई यहां जमा थी, वो अब खतरे में पड़ गयी है । और *बैंक का भविष्य तो अंधकार में आता नज़र आ ही रहा है।

प्रदेश सरकार भी कार्यवाही करने में देरी कर रही है, जिस से भी संदेह,भ्रम की स्थिति निर्मित हो रही है।  क्योंकि मामला पूर्वोत्ति बीजेपी सरकार के समय का बताया जा रहा है। एवं इस पूरे घटनाक्रम में वर्तमान पीएस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, एवं कार्यशैली भी (इस प्रकरण में) संदिग्ध नज़र आरही है। वर्तमान सरकार को जल्द ही कोई ठोस कदम उठाकर पूरी स्थिति को स्पष्ट करना चाहिये। प्रथम दृष्टया जिन पर आरोप लगा है एवं जो ज़िम्मेदार भी हैं ,आखिर उन्हें अब तक क्यों मौका दिया जा रहा है! तत्काल इनका निलंबन क्यों नही हुआ! एवं वैधानिक/कानूनी कार्यवाही अब तक क्यों नही की गयी, आखिर इन्हें महत्त्वपूर्ण पदों से अब तक क्यों नही हटाया गया! *ये तमाम प्रश्न अब उठने लगे हैं और विपक्ष भी इस मामले पर मौन है। आखिर लोकसभा चुनाव 2019 जो हैं।* सत्ताधारी दल भी एक तीर से कई निशाने करने की जुगत में नज़र आरहा है।

बकौल खबरीलाल भैया केसरिया खबर केसरिया नज़र

शैलेंद्र मिश्रा शैली 9425030127