नई दिल्ली: ‘चूंकि प्यार और डर एक साथ नहीं मौजूद सकते, अगर हमें उनमें से किसी एक को चुनना पड़े, तो प्यार से डरना कहीं ज़्यादा सुरक्षित है।’ मैकियावेली की किताब ‘द प्रिंस’ में कही ये बात आज की दुनिया की सच्चाई है। दुनिया ऐसे नेताओं को चुन रही है, जिनसे वो डर सकें। पूर्व एंबेसडर रहे राजीव डोगरा की नई किताब Autocrats…Charisma, Power and Their Lives दुनिया के उसी निरंकुश चेहरे को ईमानदारी के साथ आईना दिखाती है, जिसके अक्स में कई देशों की राजनीतिक सत्ताएं समझी और देखी जा सकती हैं।
हमारे आस-पास की दुनिया में ऐसी कई सरकारें हैं, जिनकी बागडोर ऐसे राजनेताओं के हाथ है, जो सालों से सत्ता पर काबिज हैं। वहां कहने को लोकतंत्र भी है, चुनाव भी है लेकिन सिर्फ देखने के लिए। किम जोन उन से लेकर तुर्की में एर्दोआन तक… दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऐसे लार्जर दैन लाइफ का आभामंडल रखने वाले शासकों की मौजूदगी को स्वीकारने के लिए मजबूर है।

