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पैक्ड फूड्स पर नहीं दी जरूरी जानकारी तो देना होगा 50 हजार जुर्माना

नई दिल्ली। आजकल गांव हो या शहर, हर स्थान पर कई छोटी-छोटी दुकानों पर भी पैकेट बंद खाद्य पदार्थ बिकते हैं, जिनमें कई बार न तो निर्माता का नाम, पता विवरण होता है और न ही खाद्य सामग्री के निर्माण की कोई तिथि व एक्सपायरी तिथि लिखी होती है। कई लोगों को यह पता नहीं होता है कि पैक्ड फूड्स पर यह जानकारी नहीं देना नियमों का गंभीर उल्लंघन है और इसके लिए सजा भी हो सकती है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 24 साल पुराने कोलकाता के एक मामले में दुकानदार को खाद्य अपमिश्रण निवारण कानून के उल्लंघन का दोषी माना है और 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 24 साल पुराना मामला होने और दुकानदार की आयु 60 साल होने के आधार पर नए कानून का लाभ देते हुए 3 माह की कैद की सजा हटा दी और उसके स्थान पर 50000 रुपए जुर्माना तय कर दिया है। इस मामले में निचली अदालत से लेकर हाई कोर्ट तक दुकानदार को अपराध के समय लागू खाद्य अपमिश्रण निवारण कानून के तहत 3 महीने कैद और 1000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके अलावा एक पार्टनर को 2000 रुपये जुर्माने की सजा दी थी। गौरतलब है कि यह फैसला न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया औ न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वारले की पीठ ने 7 मार्च 2024 को सुनाया।
गौरतलब है कि इस मामले में दुकान में बिक रहे पैकेट बंद खाद्य पदार्थ को जांचने में उसमें कोई मिलावट नहीं मिली थी, लेकिन पैकेट पर निर्माता का विवरण, पता व निर्माण की तिथि न लिखी होने के कारण दुकानदार को मिस ब्रांडिंग का दोषी पाया गया और 50000 रुपए जुर्माना लगाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब अपराध घटित हुआ था, उस दौरान खाद्य अपमिश्रण निवारण कानून 1954 लागू था, जो अब रद्द हो चुका है और उसके स्थान पर खाद्य सुरक्षा और मानक कानून 2006 लागू है। नए कानून में मिस ब्रांडिंग पर धारा 52 में 3 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन कैद की सजा का प्रावधान इसमें नहीं है।

Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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