बायजू की वैल्यू जीरो यूं ही नहीं हुई है। कंपनी ने पिछले कुछ समय में ऐसे फैसले लिए जो उस पर अब भारी पड़ गए हैं। बायजू पर आज भारी कर्ज है। साथ ही इस कंपनी को रेगुलेटरी जांच से भी गुजरना पड़ रहा है और उनसे अपनी फाइनेंशियल रिपोर्टिंग में देरी की है। इससे कंपनी की वित्तीय हालत और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल कंपनी दिवालियापन संकट से जूझ रही है।
1. कंपनियां खरीदना
बायजू ने बड़ी कंपनी बनने के लिए कई कंपनियों का अधिग्रहण किया। कोरोना के समय ऑनलाइन एजुकेशन में बूम आने के कारण कंपनी ने खुद को विस्तार करने की योजना बनाई। ऐसे में इसने व्हाइटहैट जूनियर और ग्रेट लर्निंग जैसी कंपनियों का अधिग्रहण कर लिया। इसमें व्हाइटहैट जूनियर का अधिग्रहण करीब एक बिलियन डॉलर में किया था। इससे बायजू पर 1.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज हो गया। यह कंपनी के रेवेन्यू से कहीं ज्यादा था।
2. कोरोना के बाद आई मंदी
कोरोना से पहले जहां ऑनलाइन एजुकेशन सेक्टर बूम पर था तो वहीं इसके बाद इसमें तेजी से मंदी आई। इसका कारण था कि स्टूडेंट वापस स्कूल जाने लगे और कोचिंग भी ऑफलाइन मोड में शुरू हो गईं। चूंकि बायजू ऑनलाइन एजुकेशन की सुविधा देती है, ऐसे में इस कंपनी पर भी बुरा असर पड़ा। वित्त वर्ष 2021-22 में कंपनी ने 5592 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया। वहीं पिछले वर्ष के दौरान यह घाटा 2428 करोड़ रुपये था।

