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देश के 10 बड़े लैबों में हो रही रहस्यमयी फंगस की जांच, इसी की वजह से हुई हाथियों की मौत

भोपाल: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) में 10 जंगली हाथियों की मौत एक विशेष प्रकार के कवक (फंगस) के कारण हुई है। जांच रिपोर्ट में यह साफ है कि हाथियों की मौत इसी फंगस से हुई है लेकिन इस फंगस की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। यही मध्य प्रदेश वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। अधिकारी इस मामले की जांच के लिए देश की 10 बड़ी प्रयोगशालाओं, जिनमें हैदराबाद का ICAR भी शामिल है, से रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

इसके साथ ही जांच में साइनाइड, नाइट्रेट-नाइट्राइट, भारी धातुओं या ऑर्गेनोफॉस्फेट, ऑर्गेनोक्लोरीन, पाइरेथ्रॉइड या कार्बामेट जैसे किसी भी सामान्य कीटनाशक का कोई निशान नहीं मिला। हालांकि, सभी जमा किए गए नमूनों में साइक्लोपियाज़ोनिक एसिड का पता चला, जिसकी मात्रा 100 ppb से अधिक थी। सटीक स्तर निर्धारित करने के लिए आगे की जांच चल रही है।

सात एकड़ में कोदो

हाथियों ने जो कोदो खाया था, वह बांधवगढ़ के अंदर 7 एकड़ जमीन पर फैला हुआ था। एक अधिकारी ने बताया कि हालांकि जांचकर्ताओं ने असामान्य वृद्धि देखी, लेकिन उन्हें अभी तक किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे किसी भी कीटनाशक का कोई निशान नहीं मिला है। किसानों ने भी इससे इनकार किया है।

10 लैब कर रही है जांच

एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, पूरे भारत में दस प्रयोगशालाओं को इस रहस्यमय कवक की पहचान करने के लिए लगाया गया है, जिसे दस हाथियों की मौत से जोड़ा गया है। इस घटना के बाद व्यापक वैज्ञानिक जांच शुरू की गई। हाथी 29 अक्टूबर, 2024 को मरना शुरू हुए थे, शुरुआती रिपोर्ट में एक फंगस संक्रमण की उपस्थिति का संकेत दिया गया था जो अचानक हुई इन मौतों के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

फंगस की पहचान है जरूरी

जांच में शामिल एक प्रमुख शोधकर्ता ने कहा कि हम इन हाथियों की मौत के लिए जिम्मेदार फंगस के प्रकार की पहचान करने के लिए सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में मृत जानवरों और आसपास के वातावरण से नमूनों का परीक्षण शामिल है। भारत भर में दस प्रयोगशालाओं का सहयोग हमें कारणों का पता लगाने और उचित समाधान खोजने में मदद करेगा।

जांच रिपोर्ट पर संदेह

दूसरी ओर, वन्यजीव कार्यकर्ता प्रयोगशाला के निष्कर्षों पर संदेह जता रहे हैं। अजय दुबे ने कहा कि अगर कोदो इतना खतरनाक है, तो मैं प्रधानमंत्री से इसके निर्यात पर रोक लगाने का अनुरोध करने जा रहा हूं।

कोदो की फसल पर नजर

वहीं, वन विभाग के अधिकारी इस पर कड़ी नजर रख रहे हैं। साथ ही बफर जोन में निगरानी बढ़ा दी गई है। 5000 एकड़ भूमि पर कोदो की फसल के बारे में पता चला है। सीएम मोहन यादव ने हाथी टास्क फोर्स का गठन किया है। इस बीच अधिकारियों को कर्नाटक और तमिलनाडु भेजा जाएगा, जहां हाथियों के प्रबंधन के बारे में सीखेंगे।

एक अधिकारी ने कहा कि हमें अब हाथियों के साथ रहना सीखना होगा। अब लोगों को उनकी उपस्थिति के बारे में जागरूक करने और उनके साथ रहने के प्रयास किए जा रहे हैं।
Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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