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ब्रेन डेड पिता ने कई लोगों को दी नई जिंदगी, अंगदान के लिए भोपाल से इंदौर तक बना ग्रीन कॉरिडोर

भोपाल: भोपाल में 73 साल के एक बुजुर्ग की मौत के बाद उनके परिवार ने अंगदान का फैसला किया, जिससे तीन लोगों की जिंदगी बच गई। बुजुर्ग की मौत ब्रेन डेड होने की वजह से हुई थी। परिवार के इस नेक फैसले से भोपाल और इंदौर में तीन लोगों को नई जिंदगी मिली।

इस तरह बना ग्रीन कॉरिडोर

शैल्बी हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विवेक जोशी ने बताया कि अस्पताल में एक्सपर्ट टीम ने 1 घंटे में लिवर ट्रांसप्लांट किया है। इसके लिए भोपाल से इंदौर तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। ग्रीन कॉरिडोर बनाने में शासन-प्रशासन व ट्रैफिक ने योगदान दिया। इंदौर का सफर करीब तीन घंटें में पूरा किया गया। ट्रांसप्लांट के कुछ समय बाद 54 वर्षीय पेशेंट बातचीत करने लगे। इसमें एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दिक्षित का भी योगदान रहा।

ब्रेन स्टोक के कारण ब्रेन डेड हुए गिरीश

डॉ. अनुरेश जैन ने बताया कि बुधनी निवासी 73 वर्षीय गिरीश यादव को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। बाद में उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। गिरीश के बेटे विनय यादव ने डॉक्टरों से सलाह करके अपने पिता के अंगदान का फैसला लिया।

भोपाल में बचाई दो जिंदगियां

मिली जानकारी के मुताबिक एक किडनी भोपाल एम्स में 21 साल की एक युवती को ट्रांसप्लांट की गई। दूसरी किडनी भोपाल के ही बंसल अस्पताल में एक मरीज को दी गई। इससे इन दोनों मरीजों को भी नया जीवन मिला।

Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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