खंडवा, बोरगांव बुजुर्ग। निमाड़ अंचल में भगोरिया की शुरुआत हो गई है। मजदूरी और रोजगार के लिए महानगरों में गए आदिवासी लौटने से गांवों में रौनक बढ़ गई है। होली से एक सप्ताह पूर्व जिले के आदिवासी बाहुल्य अंचल में भगोरिया बाजार व मेले लगना शुरू हो जाते हैं। इसकी शुरुआत सोमवार को ग्राम धूलकोट व दीवाल हाट बाजार से हुई। भगोरिया बाजार की तारीख पंचायत की बैठक तय की जाती है। परंपरानुसार मार्च के दूसरे सप्ताह से भगोरिया बाजार की शुरुआत हो जाती है।
आदिवासी समाज एक पखवाड़े से पर्व की तैयारी में जुटा हुआ है। पंधाना ब्लाक के बोरगांव में लगने वाला भगोरिया बाजार जिले का प्रमुख बाजार है। इसके लिए पंचायत द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं जुटाई जाती हैं। जिले में लगने वाले भगोरिया बाजार में समाज की युवतियां व महिलाएं अपने पारंपरिक लिबास में सज-संवरकर पहुंचेंगी।
परिवार के साथ पहुंचे आदिवासियों ने बाजार में सजी दुकानों पर जमकर खरीदी करेंगे। वहीं झूलों का भी भरपूर आनंद लिया जाएगा। आदिवासी युवाओं ने भी नए जमाने के परिवेश के साथ ही अपनी संस्कृति व परंपरा का निर्वाह करेंगे।
मांदल की थाप व बांसुरी की मधुर ध्वनि पर जमकर थिरक आदिवासी समुदाय भगोरिया मनाएगा। बाजार में आसपास के गांव और फालियों से बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार सहित शामिल होंगे। होली तक अंचलों में शाम तक भीड़ और उल्लास रहता है।
भगोरिया पर्व को लेकर हाट बाजारों में रौनक आ गई है। दुकानों पर भीड़ से व्यापार भी अच्छा होता है। व्यापारियों को भी भगोरिया बाजार का इंतजार रहता है। क्षेत्र में लगने वाले भगोरिया बाजारों को लेकर ग्राम पंचायतों के अलावा पुलिस भी मुस्तैद रहती है। जहां भगोरिया बाजार लगेगा वहां सुरक्षा के लिए पुलिस की तैनाती रहेंगी।
भगोरिया बाजार शुरू होने पर दूसरा बाजार बोरगांव में लगता है। जिले का सबसे बड़ा भगोरिया बाजार होने से आदिवासियों में इसे लेकर उत्साह रहता है। शनिवार को लगने वाले भगोरिया बाजार में 15 हजार से अधिक लोग शामिल होते हैं। बाजार में कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन, कटलरी और घरेलू व कृषि उपयोग की सामग्री की दुकानों के अलावा मनोरंजन के लिए झूले लगेंगे। शीतल पेय, शृंगार सामग्री, मिठाई व जलेबी की दुकानें आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
क्षेत्र में आदिवासी समाज अधिकांश कृषि पर आश्रित है और इस बार लगभग गेहूं और चने की फसल की कटाई हो चुकी है। फसलें आने से समाज के पास पैसा होगा और इसका रंग भगोरिया हाट में देखने को मिलेगा। समाज के लोग पैसा पास होने से पर्व का पूरी तरह आनंद लेंगे। बता दें की क्षेत्र के जो आदिवासी मजदूर अन्य राज्यों में या दूर मजदूरी करने गए थे वो भी पर्व मनाने को लौट आए हैं और समाजजन के साथ पर्व मनाएंगे।
निमाड़ अंचल में हुई भगोरिया की शुरुआत, भगोरिया बाजार में ढोल और मांदल की मस्ती में झूमता जनजातीय समूदाय

