पंजाब की सियासत की उलझती कैसेट…..
खरी-खरी…..
शैलेन्द्र मिश्रा शैली
15/जुलाई/2021
पंजाब में कांग्रेस फिर से जीत सकती थी! लेकिन यहां कांग्रेस के भीतर ही, रायता फैला हुआ है, और समेटने वाले भी अब थक चुके हैं शायद।
ऐसा इसलिए भी क्योंकि बड़े स्तर पर कार्यकर्ता तो कैप्टन के साथ हैं, लेकिन आलाकमान ( R,P ) सिद्धू के साथ दिख रही है!
संभवतः सिद्धू इसीलिए भारी पड़ते दिख रहे हैं!!!
इस पूरे झमेले में बड़ी बात ये है कि, मतदाता अब सोचने पर विवश रहेगा, की कहीं आगामी चुनाव में यदि कांग्रेस को मत दिया और सरकार फिर बनी, तो तमाशा फिरसे पूरे 5 साल न चले!
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इसीलिए कांग्रेस को खुदके मजबूत राज्यों में कम-अनुभवी लोगों की दखलअंदाज़ी को सीमित कर देना चाहिए।
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