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एमपी को लेकर संघ और भाजपा की कल महत्त्वपूर्ण बैठक दिल्ली में…

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023…..बीजेपी-संघ (आरएसएस) की समन्वय बैठक कल दिल्ली में!

ड़ी खबर केसरिया खबर@sms

27/अप्रैल/2022

कल गुरुवार को देश की राजधानी दिल्ली में होगा महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन। जिसमें संघ RSS के पदाधिकारी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित मप्र बीजेपी के कोर ग्रुप के नेता भी मौजूद रहेंगे।

बैठक आगामी विधानसभा चुनावों vidhansabha election 2023 की तैयारियों के सिलसिले में बुलाई गयी है।

आज बुधवार को बैठक से ठीक पहले मप्र के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा दिल्ली पहुंचे हैं और उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से सौजन्य भेंट भी की है।

भोपाल, केसरिया विश्वस्त सूत्रों के हवाले से खबर है कि,हाल ही में अपने एक दिवसीय दौरे पर आए देश के गृह मंत्री अमित शाह ने शिवराज सिंह चौहान के कामकाज से साधारण संतोष व्यक्त किया और यही नहीं मप्र बीजेपी संगठन के काम काज से असंतोष व्यक्त करते हुए पार्टी अध्यक्ष को भी उन्होंने सीधा कहा की आप आयातित लोगों को सही दिशा नही दे पा रहे हैं। आपको और अधिक मिलनसार होना पड़ेगा! सूत्र बताते हैं कि अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कांग्रेस छोड़ बीजेपी आए नेताओं और खासकर मंत्रियों के लिए ये बात कही,क्योंकि 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी कांग्रेस को छोड़ बीजेपी में शामिल हुए विधायक,खासकर जो अब मंत्री हैं,उनके संदर्भ में शाह की दो टूक… सभी से मेलजोल बढ़ाकर उन्हें संगठन और संगठन से जुड़े शीर्ष नेताओं के प्रति अपने व्यवहार को विनम्र बनाने की नसीहत दी गई है साथ ही संगठन को गतिविधियों में उनकी हिस्सेदारी को भी बढ़ावा दिए जाने की बात कही गई है।

दरअसल कांग्रेस की सरकार गिराकर,बीजेपी को सत्ता वापसी देने में सबसे बड़ा योगदान सिंधिया और उनके खेमे का है। लेकिन उनके समर्थक मंत्रियों की बीजेपी संगठन और शीर्ष नेताओं में अधिक रुचि न होना केंद्रीय नेतृत्व के लिए चिंता का विषय भी बन गया है।

केसरिया खरी-खरी….शैलेंद्र मिश्रा शैली..

खैर अब नेता (कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए) भी क्या करें वो कांग्रेस कल्चर से बाहर नहीं आपारहे हैं क्योंकि कांग्रेस के भीतर दरबारी पॉलिटिक्स हमेशा से ही अधिक महत्त्वपूर्ण रही है। जिस नेता-कार्यकर्ता का जो आका होता है, वो सिर्फ अपने आका के लिए भरोसेमंद और उपलब्ध होता है! और इसी कारण महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) से भाईसाहब बनने तक के सफर में सिंधिया खेमे को बीजेपी में एडजस्टमेंट में सबसे ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसको गलत साबित करने के लिए जमीन पर उतरकर चरण छूने तक के जतन शुरू कर दिए हैं (हाल ही में एक कार्यक्रम में सफाईकर्मियों के पैर छुए थे) । जिस से वो आसानी से बीजेपी में सेट हो जाएं और अपने लक्ष्य (मप्र के मुख्यमंत्री पद) को आसानी से पा सकें।

अब ये देखना दिलचस्प होगा कि हमेशा की भांति शिवराज सिंह चौहान अपने विरोधियों को किस तरह शांत करेंगे और उनकी एकाएक बढ़ी सक्रियता उनके लिए लाभ का विषय साबित हो सकता है।

हालांकि चतुर चौहान (बुद्धिमान शिवराज सिंह चौहान) ने पचमड़ी चिंतन शिविर में काफी हद तक अपने मंत्रिमंडल की कसावट भी कर दी है! और संघ (आरएसएस) का उनको पर्याप्त समर्थन उनके विरोधियों के लिए हमेशा चिंता का सबब बना ही रहता है। बहरहाल बीजेपी आज से नही हमेशा से ही संगठन की मजबूती को साबित करने के लिए रिस्क लेती रही है फिर भले ही वो कोई युवा नेता पार्टी अध्यक्ष बना हो या किसी राज्य का सीएम ये किसी से छिपा नहीं।

लेकिन एक खास बात….मप्र में कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की मोजूदगी बीजेपी के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। भले ही इसको बीजेपी आमजन को महसूस न होने दे,लेकिन कमलनाथ के नेतृत्व में ही मप्र में कांग्रेस की ये अंतिम चुनौती 2023 के विधनसभा चुनाव में भाजपा को होगी। और क्यों होगी इसके कई फैक्ट्स हैं जिनकी चर्चा आगे कभी करेंगे।

दूसरी तरफ लंबे समय से मप्र के सीएम के रूप में शिवराज सिंह का नेतृत्व अब संगठन और बीजेपी नेताओं को आसानी से नहीं पचता है। भले ही लाख दिखावे हों एकजुटता दिखाने के लेकिन बीजेपी के अंदर भी अब कई गुट और दरवाजे हैं,जो मप्र में चेहरा बदलने की हवाओं को लगातार जोर देते रहे हैं। हालांकि शिवराज सिंह चौहान इन हवाओं को कैद करने में भी सफल रहे हैं। और अब उनका कद न केवल प्रदेश बल्कि देश की राजनीति में काफी ऊंचा हो चुका है और खासकर ओबीसी वर्ग को लुभाए रखने में वो सफल भी रहे हैं। यही कारण है कि आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी सिंधिया कार्ड मप्र में खेल सकती है! और इसी के चलते शाह की समझाइश को भी देखा जा सकता है। साथ ही कल की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के साथ साथ आगामी समय में मप्र में शिवराज कैबिनेट में बदलाव और नए चेहरों को शामिल करने को लेकर भी कोई निर्णय लिया जा सकता है।

Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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