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सिंधिया के तीखे बोल..कर्जमाफी पर घिरी कमल सरकार..कांग्रेस में पावर पॉलिटिक्स!

केसरिया खबर केसरिया नज़र@sms

11/अक्टूबर/2019 भिंड मप्र

गर्म तासीर वाले चम्बल क्षेत्र की सियासत गरमाई..सिंधिया और सिंह की नज़दीकियों ने मप्र कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाई…सिंधिया ने किसान कर्जमाफी की याद दिलाई!

भोपाल,भिंड- मप्र के चम्बल क्षेत्र जिसकी तासीर हमेशा से गर्म ही मानी जाती है क्योंकि चम्बल और यहां के बीहड़ आपने ज़रूर सुना होगा कभी ये क्षेत्र डाकुओं की शरणस्थली के लिए भी जाना जाता था । लेकिन इस क्षेत्र में समय के साथ अनुकूल विकास न होने के चलते ये क्षेत्र खासकर भिंड जिला अभी भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं और विकास से वंचित है।

इन दिनों चंबल क्षेत्र की राजनीति भी काफी गरमाई हुई है क्योंकि ग्वालियर राजघराने यानी सिंधिया परिवार की हमेशा इस क्षेत्र में राजनीतिक दखलंदाज़ी रही है। लेकिन इन्ही सब के बीच 90 के दशक में कांग्रेस में शामिल हुए “छोटे कद के बड़े नेता” जो कि समाजवाद को अलविदा कहकर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े भिंड की लहार विधानसभा सीट से और तबसे अब तक यानी लगभग ढाई दशक के अधिक समय से अपना रुतबा इस क्षेत्र में कायम रखा है वो शख्स हैं डॉ गोविंद सिंह ,जो कि वर्तमान सरकार के कैबिनेट मंत्री भी हैं और डॉक्टर गोविंद सिंह की पूरी राजनीति में उन्होंने हमेशा महल से यानी सिंधिया परिवार से एक निश्चित दूरी बनाई रखी। डॉक्टर गोविंद सिंह को हमेशा से ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कट्टर समर्थक एवं विश्वसनीय माना जाता रहा है जिसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि मप्र सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में से एक कैबिनेट मंत्री इस वक्त डॉक्टर गोविंद सिंह है एवं उनको प्रभारी मंत्री भोपाल जिले का बनाया गया है एवं भिंड जिले का प्रभारी मंत्री आरिफ अकील को बनाया गया है जोकि खुद भी दिग्विजय सिंह समर्थक माने जाते हैं इसके अलावा और भी कई उदाहरण है।

आखिर इन दिनों चंबल की सियासत क्यों गर्मा गयी है उसका मुख्य कारण है सिंधिया परिवार के युवराज ज्योतिराज सिंधिया और डॉक्टर गोविंद सिंह की बढ़ती नजदीकियां वह भी ठीक उस वक्त जब मध्यप्रदेश में झाबुआ उपचुनाव है ।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ऐसे वक्त विदेश गए जब हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे प्रदेशों के महत्वपूर्ण चुनाव नज़दीक हैं। इस घटनाक्रम को भी राहुल गांधी की नाराजगी से जोड़कर देखा गया क्योंकि जिस दिन वह विदेश के लिए निकले उसी दिन उनके नजदीकी युवा नेता अशोक तंवर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया मुंबई में संजय निरुपम के तीखे बोल हों या मध्य प्रदेश के सबसे प्रभावशाली युवा नेता ज्योतिराज सिंधिया की लगातार चल रही नाराजगी हो, ऐसे वक्त में डॉक्टर गोविंद सिंह और ज्योतिराज सिंधिया की नजदीकी कई राजनीतिक अनुमानों को जन्म देती है जिसकी अभी भविष्यवाणी करना भले ही जल्दबाजी हो लेकिन चंबल की राजनीति में एक नया अध्याय अब जुड़ने जा रहा है ,क्योंकि सर्वज्ञात है विपरीत परिस्थितियों में भी डॉक्टर गोविंद सिंह ने अपना विश्वास और समर्पण कांग्रेस पार्टी में तो रखा ही साथ ही कभी भी दिग्विजय सिंह से हटकर कहीं और भी नहीं रखा है।

आज भिण्ड में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ही सरकार को घेरा कहा- “किसानों का जो कर्जा माफ हुआ है वो पूर्ण रूप से नहीं हुआ है, केवल 50 हजार का कर्जा माफ हुआ है जबकि 2 लाख का बोला था” इस बयान ने मप्र की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है क्योंकि ज्योतिराज सिंधिया की नाराजगी लगातार जगजाहिर हो चुकी है और ऐसे वक्त जब राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी नहीं है सोनिया गांधी इस पद की जवाबदारी संभाल रही हैं और विधानसभा चुनाव से पूर्व यह माना जा रहा था यदि मध्यप्रदेश में कांग्रेस बहुमत अर्जित करती है तो युवा चेहरे के रूप में ज्योतिराज सिंधिया मध्य प्रदेश की कमान संभालेंगे तो वही राजस्थान में सचिन पायलट ,लेकिन ऐसा हो ना सका यहां तक कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर भी सिंधिया का नाम आगे आया तो कई प्रकार के नए विरोधाभास परिस्थितियों ने जन्म लिया और इसी बीच उनको महाराष्ट्र स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बना दिया गया जिसके बाद भी ज्योतिराज सिंधिया संतुष्ट और शांत नजर नहीं आ रहे हैं।

और अब उपचुनाव के नजदीक आने पर उनका (ज्योतिरादित्य सिंधिया) यह कर्ज माफी का बयान का सर हरियाणा और महाराष्ट्र नाव में भी नजर आ सकता है जो कि अब कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखा जा सकता है और अब इंतजार है तो मध्य प्रदेश के मुखिया कमलनाथ की प्रतिक्रिया का!

केसरिया डेस्क एवं भिंड संवाददाता रिपोर्ट

Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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