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उमा भारती का सियासी पत्थर!

उमा भारती का सियासी पत्थर!

यूपी में बाबा (सीएम योगी आदित्यनाथ) की वापसी के साथ ही मध्यप्रदेश में शराबबंदी को लेकर बीजेपी की फायरब्रांड नेत्री रहीं पूर्व सीएम उमा भारती ने अंततः सियासी पत्थर राजधानी भोपाल में रविवार को उछाल ही दिया…

भोपाल 13/मार्च2022

शैलेंद्र मिश्रा शैली
9425030127, kesarianews@gmail.com..

यूं तो मध्यप्रदेश शांति का टापू रहा है,यहां गंगा जमुनी तहजीब के साथ साथ हर जिले और शहर में धार्मिक महत्त्व और भाईचारा भी है। 2003 में दिग्विजयी रथ को बीजेपी की उमा भारती ने रोक दिया था। और मप्र में भगवा मुख्यमंत्री की सफल एंट्री भाजपा ने भारती के रूप में लेली थी, ये बात अलग है की उनका कार्यकाल खुद बीजेपी ही नही पचा पाई! और अब लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश में बीजेपी की बंपर भगवा वापसी हुई है!
यहां ये भी बता दें कि,2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में, उमा के नेतृत्व में भाजपा ने तीन-चौथाई बहुमत प्राप्त किया और मुख्यमंत्री बनीं। अगस्त 2004 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जब उनके खिलाफ 1994 के हुबली दंगों के सम्बन्ध में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। हालांकि उसके पीछे के कारणों पर आज भी चर्चाएं होती रहती हैं।

खेर अब बात हो जाए उमा भारती के सियासी पत्थर की जो उन्होंने आज रविवार को मप्र की राजधानी भोपाल में एक लाइसेंसी शराब की दुकान में घुसकर उछाल दिया है।


दरअसल ये पत्थर शराब की बोतलों पर नही उछाला गया है,बल्कि सीधे मप्र के पांव पांव वाले भैया जनता के मामा और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की नीतियों और उनके सियासी चक्रव्यू के खिलाफ उछाला गया है।

दरअसल पिछले कुछ वक्त से उमा देश और प्रदेश की राजनीति में हाशिए पर जा रहीं हैं। उन्होंने सही मौके पर विरोध स्वरूप जो पत्थर उछाला है उसे 2004 के सियासी उलटफेर से भी जोड़कर देखा जा सकता है।

क्योंकि बंपर वोट लाने के बाद भी उमा भारती महज चंद महीने ही सीएम के रूप में मप्र में रही थीं और इतना ही नहीं बाद में उनका विरोध करना,पार्टी से बाहर होना और फिर एक बार वापसी। दिन था 7 जून 2011 जब उमा ने अशोक रोड, दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय में बीजेपी पुनः ज्वाइन की। राजनीतिक प्रेक्षकों ने इसे उमा का दूसरा राजनीतिक जन्म भी कहा। अब एक बार फिर उमा भारती कुछ करना चाहती हैं और खासकर मप्र से उनका लगाव भी है और हो भी क्यों न आखिर उन्होंने एमपी में बीजेपी की बंपर वापसी जो कराई थी जो निरंतर जारी है बस 2018 छोड़कर।

किस्से और हकीकत के हिसाब से भारती और शिवराज सिंह चौहान के बीच शुरू से ही सब कुछ ठीक नहीं रहा। हालांकि चतुर चौहान (शिवराज सिंह) ने कभी भी इस बात का सार्वजनिक एहसास नहीं होने दिया और हमेशा उमा भारती को सम्मान देते रहे हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो अपनी राजनीतिक सफलता की लकीर बड़ी की ही उसके आगे उनके विरोधियों की भी नीतियां फेल हो गई हैं। अब तो उनकी पार्टी के ही सुपरस्टार खिलाड़ी खुद प्रधानमंत्री मोदी भी उनकी तारीफ करते देखे जा चुके हैं। शिवराज सिंह चौहान ने अपनी राजनीति में शतरंज के खिलाड़ी की भांति हर कदम सोच विचार के ही चला है। उनकी सरलता और मधुरता के पीछे एक परिपक्व राजनेता है जो उन्हें धीरे धीरे भारत की सत्ता के शीर्ष सिंहासन की और ले जा रहा है। जिसे अब राजनेतिक पंडित भी अपनी भविष्यवाणियों में कहने लगे हैं!

अब बात साध्वी उमा की,जिन्होंने शराबबंदी के नाम पर जो सियासी पत्थर उछाला है और वो कितनी चोट करेगा ये तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात जो अब स्पष्ट है वो ये की उमा भारती भले ही भगवा को सिंहासन की वापसी मानकर ही सही, राजनेतिक स्टंट अपना रही हैं, उसके पीछे कहीं न कहीं शिवराज सिंह चौहान के वो राजनेतिक विरोधी लोग भी हैं, जो उनके (उमा भारती) आक्रामक स्वभाव का फायदा लेकर शिवराज सिंह को बैकफुट में धकेलना चाहते हैं। लेकिन चतुर चौहान (बुद्धिमान) ने अपने विरोधियों को समय से पहले ही रिटायर भी करा दिया है ये खासकर मप्र की राजनीति करने वालों को नही भूलना चाहिए।

और अंत में शराबबंदी मप्र में ही नहीं देश भर और दुनिया भर में होनी चाहिए जो असंभव है,लेकिन इसके इस्तमाल को कम और इसकी गुणवत्ता को जरूर बेहतर किए जाने की जरूरत और गुंजाइश भी है। और जनता की भलाई को भी नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन कड़वा सच ये भी है की राज्यों की बड़ी आय भी मदिरा बिक्री से ही होती है। और जिन राज्यों में भी शराब बंदी हुई है वहां आज भी आसानी से शराब मिल जाती है और बकायदा बड़ा माफिया तंत्र है जो राजनेतिक संरक्षण से लगातार फल फूल रहा है।
इसलिए फिलहाल तो उमा के उछाले सियासी पत्थर का असर कितना होगा ये वक्त बताएगा लेकिन भारती के स्टंट पर मौन धारण किए चतुर चौहान जरूर ही जल्द कोई नया स्टंट करने वाले हैं,जिसका बेसब्री से सभी को इंतजार भी है।

Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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