Site icon Kesaria News

साध्वी की नैया डुबायेंगे ये नेता

साध्वी प्रज्ञा

भोपाल, लोकसभा चुनाव 2019

केसरिया खरी-खरी – केसरिया ख़बर केसरिया नज़र

बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा की नैया डुबायेंगे मीडिया समन्वयक एवं प्रदेश प्रवक्ता जो कि राष्ट्रीय स्तर के स्वयंभू नेता भी हैं और महाशय दिनभर में 3 बार कुड़ते पैजामे बदलने के लिए भी जाने जाते हैं।

दरअसल भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को समय रहते प्रत्याशी बनाया और दिग्विजय सिंह ने अपने चुनाव क्षेत्र को लगभग पूरा घूम लिया है और अपनी पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और जनता से भी अपना सीधा संपर्क बना रखा है और खासकर मीडिया से उनका समन्वय सबसे बेहतर नज़र आरहा है। दिग्विजय सिंह ने मीडिया समन्वय की ज़िम्मेदारी पूर्व मप्र काँग्रेस के मीडिया प्रभारी रहे माणक अग्रवाल को दी है, माणक मीडिया मैनेजमेंट के बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं। और यही कारण है कि प्रतिदिन मीडिया को ब्रीफिंग से लेकर मीडियाकर्मियों से सतत संपर्क में रहते हैं अग्रवाल।

और दूसरी और जहां बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से उम्मीदवार देरी से घोषित किया, साध्वी खुद के साथ हुए ज़ुल्मों की दास्तान को लेकर चुनाव मैदान में हैं और फिलहाल चुनाव आयोग से मिली सजा के फलस्वरूप 72 घंटों का प्रतिबंध झेल रही हैं ।

साध्वी प्रज्ञा की राजनीति में एंट्री भी ठीक टिकट मिलने के चंद घंटों पहले हुई , जिसके चलते चुनावी मैनेजमेंट और अन्य मामलों में साध्वी प्रज्ञा को बीजेपी नेताओं पर ही भरोसा करना पड़ रहा है।

जिसके फल स्वरूप जहां एक और साध्वी प्रचार प्रसार और मीडिया समन्वय में पीछे हैं ,तो वहीं स्वास्थ्य कारणों से भी उनकी जनता के बीच पकड़ कमज़ोर नज़र आती है। बीजेपी ने डॉ. हितेश वाजपेयी जो कि बीजेपी सरकार में नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे और इनको विनय सहस्त्रबुद्धे और प्रभात झा के आशीर्वाद से साध्वी का मीडिया समन्वयक बनाया गया है। ये वही वाजपेयी साहब हैं जो कि अपने पानमसाले के बिल भी निगम से वसूलने के लिए जाने जाते थे, जिसके चलते बीजेपी की भी किरकिरी जनता और मीडिया में जमकर हुई थी।

अब हाल ये हैं कि साध्वी प्रज्ञा के लिए मीडिया समन्वय तो दूर दूर तक नज़र नही आता , क्योंकि महाशय इतने वरिष्ठ हैं कि वो न तो मीडिया से मिलते हैं और न ही किसी के फोन उठाते हैं। हाँ कोई दो या चार गोल्डन गैंग (भोपाल में कुछ मीडिया कर्मी) के सदस्य हैं, उनसे ज़रूर महाशय बड़े होटलों में बैठक करने के लिए ही जाने जाते हैं।

अब साध्वी प्रज्ञा को मोदी और अमित शाह का ही सहारा है ,क्योंकि 15वर्षों तक बीजेपी मप्र में सत्ता में भले ही रही लेकिन चौथी बार जीत का स्वाद नही चख पाई और इन्ही के जैसे नेताओं को लगता है, कि लोकसभा चुनाव 2019 के बाद मप्र में विधायकों को तोड़ कर और अपने साथ लेकर सत्ता में वापिस काबिज़ हो जाएंगे।

भोपाल में तो ये भी चर्चा है कि बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेता जिनमे विधायक और पूर्व मंत्री भी हैं, उनको दिग्विजय सिंह का व्यक्तिगत कर्ज़ भी चुकाना है जो उन्होंने सीएम रहते कृपा स्वरूप किये थे।

इस लेख का आशय किसी व्यक्ति विशेष को गलत ठहराने का नही है ,बल्कि बीजेपी को आइना दिखाना है।

भोपाल लोकसभा बीजेपी का गढ़ मानी जाती रही है, और अब भोपाल लोकसभा सीट कांग्रेस की मजबूत किलेबंदी में घिरती नज़र आरही है।

शैलेंद्र मिश्रा शैली
9425030127

Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

Exit mobile version