Site icon Kesaria News

कावेरी मुद्दे को लेकर शिवकुमार ने कहा – ‘कोई पानी नहीं छोड़ रहा और वे खेल रहे’

कर्नाटक | कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने भाजपा के इस आरोप को खारिज कर दिया कि कांग्रेस सरकार राज्य में पानी की भारी कमी के बीच पड़ोसी राज्य तमिलनाडु को गुप्त रूप से कावेरी नदी का पानी दे रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से झूठ है।
कावेरी नदी के पानी को लेकर सियासत जारी है। इस बीच, कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भाजपा पर कावेरी नदी के पानी को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने भाजपा के इस आरोप कि सूखे का सामना कर रहा राज्य पड़ोसी तमिलनाडु को चोरी से कावेरी का पानी दे रही है, को खारिज कर दिया। बेंगलुरु में पत्रकारों से वार्ता करते हुए डीके शिवकुमार ने भाजपा के आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि यह एक राजनीतिक खेल है, जिसे भाजपा वाले खेल रहे हैं। यह पूरी तरह से झूठ है कि कोई पानी छोड़ा गया है या छोड़ा जाना है।
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया था कि राज्य की कांग्रेस सरकार तमिलनाडु को चोरी-छिपे कावेरी का पानी छोड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि सिद्धारमैया सरकार तब ऐसा कर रही है जबकि उनके राज्य के कई हिस्से पानी की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं। भाजपा ने कहा था कि सिद्धारमैया सरकार के ऐसा करने के पीछे उसकी राजनीतिक मजबूरी है। क्योंकि वहां सत्तारूढ़ द्रमुक विपक्षी ‘इंडिया’ गुट का हिस्सा है।
भाजपा नेताओं के इन आरोपों पर डीके शिवकुमार ने पलटवार किया। उन्होंने भाजपा नेताओं को याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने ही रामानगर जिले के कनकपुरा तालुक में मेकेदातु में कावेरी नदी पर एक संतुलन जलाशय की मांग करते हुए मेकेदातु परियोजना के लिए पदयात्रा निकाली थी।
इस दौरान डीके शिवकुमार ने राज्य के कई हिस्सों में पानी की कमी को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि जहां तक बेंगलुरु की बात है कि वहां पानी का संकट है, तो ऐसा नहीं है। वहां केवल सात हजार बोरवेल सूख गए हैं। इसके लिए हमने वैकल्पिक वयवस्था बनाई है। उन्होंने कहा कि हमने जल स्रोत की पहचान की है और पानी के टैंकरों को अपने नियंत्रण में लिया है। अब इनसे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। गौरतलब है कि डीके शिवकुमार बेंगलुरु के विकास प्रभारी भी हैं।
साइनबोर्ड में 60 प्रतिशत कन्नड़ भाषा के प्रयोग पर कही यह बात
पत्रकारों से वार्ता के समय उन्होंने व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साइनबोर्ड पर कन्नड़ भाषा के प्रयोग की समयसीमा को लेकर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि साइनबोर्ड में 60 प्रतिशत कन्नड़ भाषा के प्रयोग के संदर्भ में वह नहीं चाहते कि कोई भी कन्नड़ कार्यकर्ता कानून को अपने हाथ में लें। सरकार इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने व्यापारियों को समय दिया है ताकि नियम को पूरी तरह से लागू किया जा सके। जहां तक सरकार द्वारा दी गई समय-सीमा खत्म होने की बात है, व्यापारियों ने मुझसे इसे लेकर मुलाकात की है। हम इस बारे में विचार करेंगे कि कैसे इसे पूरा कराया जा सकता है।

Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

Exit mobile version