तालाब के बीच रिसॉर्ट, करोड़ों की संपत्ति और ED का शिकंजा! MP में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा एक्शन, दो पूर्व अफसरों की 85 करोड़ से ज्यादा संपत्ति कुर्क
केसरिया न्यूज़ डेस्क | भोपाल
मध्यप्रदेश में कथित भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर केंद्रीय एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ गोविंद प्रसाद मेहरा और पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया से जुड़ी कुल 85 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर बड़ी कार्रवाई की है।
ईडी के अनुसार मेहरा से जुड़ी लगभग 67.25 करोड़ रुपये और भदौरिया से जुड़ी लगभग 18.20 करोड़ रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अटैच किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई केवल दो अधिकारियों तक सीमित नहीं रह सकती और आने वाले समय में अन्य मामलों की जांच भी गति पकड़ सकती है।
कृषि फार्म या लग्जरी रिसॉर्ट?
जांच के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा नर्मदापुरम जिले के सैनी गांव स्थित “कस्तूरी कृषि फार्म” की हो रही है। ईडी की जांच में सामने आया कि कृषि फार्म के नाम पर विकसित इस परिसर में विशाल आवासीय भवन, कॉटेज, आंतरिक सड़कें, कृत्रिम जलाशय, फार्मिंग एरिया और कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद थीं।
तस्वीरों में दिखाई देने वाला यह परिसर किसी सामान्य फार्महाउस की बजाय एक लग्जरी रिसॉर्ट जैसा नजर आता है। ईडी के मूल्यांकन के अनुसार इस संपत्ति का बाजार मूल्य लगभग 49.44 करोड़ रुपये आंका गया है।
आय से ज्यादा संपत्ति का आरोप
ईडी के अनुसार लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की गई। जांच में पाया गया कि वर्ष 1985 से फरवरी 2024 तक की सेवा अवधि के दौरान गोविंद प्रसाद मेहरा ने अपनी वैध आय की तुलना में कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।
जांच एजेंसी का दावा है कि करीब 6 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति सामने आई। तलाशी के दौरान नकदी, सोना-चांदी, निवेश दस्तावेज और अन्य संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई थी।
नकदी, सोना-चांदी और कीमती सामान भी जांच के घेरे में
ईडी के अनुसार तलाशी के दौरान लगभग 8.79 लाख रुपये नकद, करोड़ों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं बरामद हुईं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों के स्रोत के संबंध में पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
पूर्व आबकारी अधिकारी पर भी ईडी का शिकंजा
दूसरे मामले में पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया और उनके परिवार से जुड़ी 18.20 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की गई हैं।
ईडी का दावा है कि जांच में उनकी वैध आय लगभग 2 करोड़ रुपये जबकि अर्जित संपत्ति 11.18 करोड़ रुपये से अधिक पाई गई। एजेंसी के अनुसार करीब 9.18 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति सामने आई, जो वैध आय से लगभग 459 प्रतिशत अधिक है।
ईडी का कहना है कि छापेमारी के दौरान नकदी, बुलियन, सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं मिलीं, लेकिन इनके स्रोत से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
कार्रवाई से अफसरशाही में बढ़ी हलचल
ईडी की इस कार्रवाई को मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा कई मामलों में कार्रवाई की गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि पुराने मामलों की फाइलें भी दोबारा खुल सकती हैं।
केसरिया सूत्र
केसरिया न्यूज़ के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश के कुछ अन्य विभागों से जुड़े मामलों पर भी केंद्रीय एजेंसियों की नजर बनी हुई है। सूत्रों का दावा है कि PWD, आबकारी, राजस्व, नगरीय प्रशासन सहित और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की वित्तीय गतिविधियों एवं संपत्तियों की गोपनीय पड़ताल की जा रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी केंद्रीय एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यदि आने वाले समय में और कार्रवाई होती है तो यह मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी मुहिमों में से एक साबित हो सकती है।

