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नल से आया ज़हर: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 5 से ज़्यादा लोगों की मौत!

इंदौर में दूषित पेयजल से मौतें: सिस्टम फेल, प्रशासन बेपरवाह 

भागीरथपुरा जल त्रासदी ने खोली सरकारी व्यवस्था की पोल

01/जनवरी/2026 ब्यूरो रिपोर्ट

इंदौर (मध्यप्रदेश): देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार इंदौर से एक गंभीर और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के सेवन से अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों नागरिक गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हैं।

यह घटना केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि नगर निगम, जलप्रदाय विभाग और स्थानीय प्रशासन की सामूहिक विफलता को उजागर करती है।


क्या हुआ? | Facts at a Glance


स्थानीय लोगों की शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य

स्थानीय निवासियों के अनुसार कई दिनों से नलों से बदबूदार और मटमैला पानी आ रहा था। इस संबंध में नगर निगम और जलप्रदाय विभाग को शिकायतें भी दी गईं, लेकिन न तो समय पर पानी के सैंपल लिए गए और न ही क्लोरीनेशन की प्रभावी व्यवस्था की गई।

नतीजा यह हुआ कि लापरवाही ने जानलेवा रूप ले लिया और एक पूरी बस्ती इसकी कीमत चुका रही है।


प्रशासनिक कार्रवाई (अपडेट)


31 दिसंबर को मुख्यमंत्री का दौरा

मुख्यमंत्री 1 ने 31 दिसंबर को इंदौर पहुंचकर पूरे मामले की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलप्रदाय व्यवस्था की व्यापक जांच की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनस्वास्थ्य से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।


मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का रवैया भी विवादों में

पूरे मामले में जब मीडिया ने सवाल उठाए, तब 2 का रवैया भी सवालों के घेरे में आ गया। दूषित पेयजल और मौतों से जुड़े सवालों पर उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया और कैमरे के सामने उनका व्यवहार असंवेदनशील नजर आया।

जनहानि जैसे गंभीर मुद्दे पर सवालों से बचना और पत्रकारों से बदतमीजी करना जनता में आक्रोश का कारण बन रहा है।


स्थानीय पार्षद की बेपरवाही, वायरल वीडियो बना सवाल

घटना से सीधे जुड़े क्षेत्र के स्थानीय पार्षद भी इस पूरे मामले में गंभीरता से कटे हुए नजर आए। सोशल मीडिया पर उनका झूला झूलते हुए वीडियो वायरल हो रहा है, जिस पर लोग तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

जब क्षेत्र में दूषित पानी से मौतें हो रही थीं, तब जनप्रतिनिधि का यह व्यवहार संवेदनहीनता और गैर-जिम्मेदारी का प्रतीक माना जा रहा है।


राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी का नतीजा है। उन्होंने इंदौर की स्वच्छता रैंकिंग के दावों पर भी सवाल उठाए।


केसरिया न्यूज़ का सीधा सवाल

इंदौर की यह त्रासदी सिर्फ दूषित पानी की नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता की कहानी है।

Fact Check

  • क्या इंदौर में दूषित पानी से मौतें हुईं?
    हाँ। भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के सेवन से 5 मौतों की प्रशासनिक पुष्टि हो चुकी है।
  • क्या पानी में गंदगी/सीवेज की मिलावट पाई गई?
    प्रारंभिक जांच में पेयजल लाइन में दूषित पानी की आशंका सामने आई है, जांच जारी है।
  • क्या प्रशासन ने कार्रवाई की?
    हाँ। 2 अधिकारियों को निलंबित और 1 को सेवा से पृथक किया गया है।
  • क्या मुआवजे की घोषणा हुई?
    हाँ। मृतकों के परिजनों को ₹2–2 लाख की आर्थिक सहायता घोषित की गई है।
  • क्या मुख्यमंत्री इंदौर पहुंचे?
    हाँ। 31 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की।
  • मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का व्यवहार विवाद में क्यों?
    मीडिया के सवालों पर स्पष्ट जवाब न देना और असहज/असंवेदनशील प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने आई है।
  • स्थानीय पार्षद का वीडियो वायरल?
    हाँ। सोशल मीडिया पर झूला झूलते हुए वीडियो वायरल है, जिसे लेकर जनता में नाराज़गी है।

नोट: यह रिपोर्ट प्रशासनिक बयानों, स्थानीय इनपुट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। जांच प्रगति पर है।

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Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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