रमन सिंह के हाथ में एक मुट्ठी चावल और नारियल भेंटकर सौंपा त्याग पत्र और मिल गया लोकसभा का टिकट

राजनांदगांव। छत्‍तीसगढ़ गठन के बाद वर्ष 2003 में पहली बार छत्तीसगढ़ विधानसभा का चुनाव हुआ। भाजपा बहुमत के साथ जीती। डा. रमन सिंह मुख्यमंत्री तो चुन लिये गये, लेकिन वे तब विधायक नहीं थे। उनके लिए किसी विधानसभा सीट को खाली करना था। तब उनके पुराने मित्र प्रदीप गांधी राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव सीट से विधायक चुने गये थे।
विधानसभा के प्रथम सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेने के तुरंत बाद गांधी ने एक मुट्ठी चावल और एक नारियल भेंटकर डा. रमन के हाथ में अपना त्याग पत्र सौंप दिया। इसके बदले में उन्हें तीन माह बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा का टिकट मिल गया। हंसमुख और प्रखर वक्ता माने जाने वाले गांधी की कार्यकर्ताओं में ही नहीं, बल्कि आम जनता में भी तगड़ी पकड़ थी।
2004 के लोकसभा चुनाव में देवव्रत सिंह को किया था पराजित
यही कारण है कि उन्होंने खैरागढ़ राजपरिवार के युवराज देवव्रत सिंह को 2004 के लोकसभा चुनाव में पराजित कर दिया। हालांकि 2007 में एक प्रकरण में उन्हें अपनी सांसदी गंवानी पड़ी थी। डा. रमन सिंह और प्रदीप गांधी के बीच राजनीतिक मित्रता काफी चर्चा में रही है।
यही कारण है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद से ही यह चर्चा चल पड़ी थी कि डा. रमन के लिए गांधी अपनी सीट छोड़ देंगे। हालांकि इसके पहले अन्य सीटों पर भी विचार हुआ था, लेकिन सिर्फ एक बार में ही गांधी ने डा. रमन की बात सहर्ष स्वीकार कर ली।

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Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।