जगदलपुर। निर्वाचन आयोग की ओर से आचार संहिता की घोषणा होते ही लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। प्रथम चरण में 19 अप्रैल को छत्तीसगढ़ की 11 में से एकमात्र बस्तर सीट पर चुनाव होने है। नक्सल प्रभावित बस्तर में सुरक्षा दृष्टिकोण से प्रथम चरण में चुनाव तय किया गया है। छत्तीसगढ़ में इस बार के चुनाव में पहली बार होगा, जब प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बस्तर से होंगे।
कांग्रेस ने दीपक बैज को विधानसभा चुनाव के कुछ दिन पहले ही प्रदेश अध्यक्ष बनाया था और किरण देव को विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व दिया है। इस स्थिति में बस्तर की इस सीट पर प्रत्याशियों के साथ ही भाजपा-कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की भी प्रतिष्ठा दांव पर होगी। चुनावी रणनीति के तहत भाजपा ने दो मार्च को कांग्रेस से पहले प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी थी, जिसमें बस्तर सीट पर नए व जमीनी कार्यकर्ता महेश कश्यप को प्रत्याशी घोषित किया है।
दो दिन पहले बस्तर लोकसभा कोर कमेटी की बैठक में मंथन के बाद यह बात सामने आई है कि पहले प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद भी इसका अधिक लाभ प्रत्याशी उठा नहीं सके हैं, जिसके बाद प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार को गति देने का प्रयास अब शुरू हो रहा है।
इस बीच, कांग्रेस अब तक टिकट की उलझन में फंसी हुई है। भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद अचानक ही कांग्रेस आलाकमान के सामने कई दावेदार आ चुके है। इसमें से वर्तमान सांसद दीपक बैज का नाम कतार में सबसे आगे है।
कोंटा विधायक कवासी लखमा के पुत्र हरीश कवासी भी दावेदार हैं, जिनके समर्थन में बस्तर के कुछ कांग्रेसी विधायक भी दिल्ली पहुंचे थे। कई और भी दावेदार अब सामने आए हैं। इन सबके मध्य किसे टिकट दिया जाएगा, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है। अगले कुछ दिन में कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा के बाद इस सीट पर स्पष्ट प्रतिद्वंदता सामने आएगी।
नक्सल प्रभावित बस्तर में 1957 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, इसमें सुरक्षा कारणों से 234 मतदान केंद्र का स्थल परिवर्तन किया गया है। इसमें बीजापुर के 99, दंतेवाड़ा के 42, कोंटा के 42, नारायणपुर के 41, चित्रकोट के नौ और जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र का एक मतदान केंद्र है। इसमें 56 मतदान केंद्र में मतदान दल तीन दिन पहले, 169 केंद्र में दो दिन व शेष मतदान केंद्रों के लिए एक दिन पहले मतदान दल को भेजा जाएगा। बस्तर के 14,66,337 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
2019 में कांग्रेस के दीपक बैज ने लोकसभा चुनाव जीतकर 20 वर्ष तक भाजपा का गढ़ बन चुकी, इस सीट पर कांग्रेस की वापसी कराई थी। अब वे प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। इस स्थिति में उनके सामने इस सीट पर वही जादू दोहराने तो दूसरी ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के राज्य गठन के बाद से भाजपा के प्रभुत्व वाली इस सीट पर भाजपा की वापसी कराने की चुनौती होगी। 1998 के चुनाव के पहले यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही। 1980 में कांग्रेस के लक्ष्मण कर्मा जीते थे। 1984, 1989, 1991 का चुनाव जीतकर कांग्रेस के मानकूराम सोढ़ी ने इसे सीट को कांग्रेस का मजबूत किला बना दिया था।
Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

