नई दिल्ली: सरकारी बिजली कंपनी एनटीपीसी ने तीन कोयला आधारित बिजली संयंत्रों की स्थापना के लिए करीब ₹40,000 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला था। इसके लिए सरकारी कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने भी टेंडर भरा था लेकिन प्राइवेट कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने
उसे पछाड़ते हुए बाजी मार ली। यह थर्मल पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र की रुचि के फिर से उभरने का संकेत है। अधिकारियों ने बताया कि एलएंडटी ने इन तीन परियोजनाओं की स्थापना के लिए ₹43,559.83 करोड़ की बोली लगाई है, जबकि बीएचईएल की बोली ₹45,325.31 करोड़ थी।
कितनी बिजली की जरूरत
बिजली मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार देश को 2031-32 तक अतिरिक्त 80 गीगावाट स्थापित थर्मल पावर क्षमता की आवश्यकता है। एनटीपीसी ने इस साल अगस्त में तीन सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के लिए थोक निविदा के आधार पर बोलियां आमंत्रित की थीं। कुल मिलाकर, एनटीपीसी ने इस दौर में 6.4 गीगावाट अतिरिक्त कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता के लिए बोलियां आमंत्रित कीं। ये परियोजनाएं गाडरवारा एसटीपीपी चरण-II (मध्य प्रदेश में), तेलंगाना एसटीपीपी चरण-II और नबीनगर एसटीपीपी चरण-II (बिहार में) हैं। इसमें मुख्य संयंत्र पैकेज के लिए डिजाइन, इंजीनियरिंग, विनिर्माण, आपूर्ति, निर्माण, स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग का काम शामिल है।
Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।
