इंदौर। बाहर नौकरी या पढ़ने वाले लोगों के लिए किराए पर कमरा या घर लेकर रहना आम बात है। इस दौरान मकान मालिक को रेंट एग्रीमेंट ध्यान से बनवा लेना चाहिए। यह मकान मालिक और किराएदार को नियमों के दायरे में लेकर आता है।
रेंट एग्रीमेंट में मकान मालिक व किराएदार के लिए नियम लिखे होते हैं, जिसमें दोनों की आपसी सहमति होती है। इन नियमों को दोनों को फॉलो करना होता है। हम आपको रेंट एग्रीमेंट के बारे विस्तार से बताएंगे। इसको बनवाते समय मकान मालिक व किराएदार किन-किन बातों का ध्यान रखें।
रेंट एग्रीमेंट को सरल भाषा में समझें तो यह एक मकान मालिक व किराएदार को नियमों के दायरे में लाने के लिए होता है। इस समझौते में दोनों ही पार्टियों के लिए कई नियम होते हैं, जिनको फॉलो करना पड़ता है। रेंट एग्रीमेंट में मंथली रेंट, सिक्योरिटी डिपॉजिट व एग्रीमेंट का टेन्योर और कई शर्तों को शामिल किया जाता है।
किराएदारों अक्सर रेंट एग्रीमेंट से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह उनके लिए काफी फायदेमंद होता है। अगर, रेंट एंग्रीमेंट न हो तो मकान मालिक किसी भी तरह की मनमानी कर सकता है। वह आपको कभी घर से बाहर निकाल सकता है। वह कभी भी मकान का रेंट बढ़ा सकता है। आपको हाउस रेंट अलाउंस का लाभ चाहिए, तो रेंट एग्रीमेंट होना चाहिए।
मकान मालिक अक्सर इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि उनके घर पर कोई किराएदार कब्जा न कर लें। इसका उपाय है कि आप रेंट एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड जरूर करवाएं। ऐसा न करवाने पर किराएदार मकान को खाली करने से भी मना कर सकता है।
Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।
