बोल बम-बम के जयकारों से गूंजी पचमढ़ी

बम बम के जयकारों से गूंजी पचमढ़ी

केसरिया खबर केसरिया नजर

पचमढ़ी,होशंगाबाद -1अगस्त 2019


सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी में नागपंचमी के अवसर हर साल लगने वाले नागद्वारी यात्रा में इस साल भी भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. मध्यप्रदेश के साथ महाराष्ट्र और खासकर विदर्भ इलाकों से हजारों की संख्या में लोग नागद्वारी में नागदेवता के दर्शन के लिए लोग पहुँच रहे हैं. प्रशासन ने भी इस यात्रा के पुख्ता इंतजामों का दावा किया है, और हकीकत में इंतजाम भी वैसे ही नजर आ रहे है। मेले की प्रशासनिक कमान जमीन पर उतरकर एस डी एम मदन सिंह रघुवंशी अपनी प्रशासननिक टीम के साथ संभाले हुए है। वही पुलिस व्यवस्था की कमान को ग्राउंड पर उतरकर एस, डी, ओ,पी, रणविजय सिंह ने संभाल रखी है।

सतपुड़ा की खूबसूरत पहाड़ियों में एक बार फिर बम-बम के जयकारे सुनाई दे रहे हैं. क्या बड़े क्या छोटे, सभी भक्ति में डूबे इस यात्रा में शामिल होते देखे जा सकते हैं. दुर्गम पहाड़ियों, ऊपर नीची पगडँडियों, सकरे और फिसलन वाले रास्ते के बाद भी यहां लोगों का उत्साह और आस्था देखते ही बनती है. बारिश, कीचड़ , फिसलन की परवाह न करते हुए महिलाएं, बच्चे बूढें सभी भक्तिरस में डूबे अपनी यात्रा पूरी करते हैं. शायद इसलिए नागद्वारी यात्रा को अमरनाथ की यात्रा बराबर दुर्गम माना जाता है. नागदेवता के दर्शन के लिए भक्तों को करीब 40 किमी पैदल चलना पड़ता है. हालांकि यह यात्रा 29 जुलाई से शुरू हो गई है और 6 अगस्त नागपंचमी के एक दिन बाद तक चलेगा। हमारी टीम भी भक्ति और अटूट श्रृद्धा की इस यात्रा के जस्बे और उत्साह को कैद करने के लिए भक्तों के साथ हो चली.

: नागद्वारी की यात्रा के लिए दूर-दूर से लोग सीधे पचमढ़ी पहुंचते हैं. और फिर निजी वाहनों से जलगली तक पहुंचते हैं. यह वो स्थान है जहां से दरअसल नागद्वारी की यात्रा शुरू होती है. या कहें भक्तों की अपने आराध्य तक पहुँचने के लिए असल परीक्षा शुरू होती है. उसके बाद गुप्तगंगा, चित्रशाला, चिंतामन, स्वर्गद्वार और पश्विमद्वार का रास्ता तय कर लोग नागद्वारी मंदिर पहुंचते हैं और नागदेवता के दर्शन कर मन्नत मांगते हैं. ऐसा माना जाता है यहां मांगी गई हर मुराद नागदेवता पूरी करते हैं.

यह यात्रा इसलिए भी कठिन है कि नागद्वारी मेला क्षेत्र का इलाका सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आता है, जिसके कारण यहां किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है. मेला समिति अस्थाई तौर पर पहाड़ों पर लोहे की सीढ़ीं लगाकर भक्तों के लिए मार्गों का निर्माण करती है. लेकिन सवाल है कि कई पीढियों से चली आ रही इस यात्रा को लेकर प्रशासन उतना गंभीर नहीं है. लोग अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा को पूरी करते हैं. कई बार तो लोगों के गिरने फिसलने से चोट भी लग जाती है.

मटकुली से पचमढ़ी तक चिन्हित स्थानों पुलिस और मेला ड्यूटी पर लगे अधिकारी कर्मचारी काफी मुस्तेदी के साथ अपनी ड्यूटी कर रहे है। साफ सफाई को ध्यान में रखते हुए जगह – जगह मोबाईल टॉयलेट की व्यवस्था की गई है। पानी की आपूर्ति सुचारू बनाये रखने के लिए जिले भर से पानी के टैंकर बुलाये गये है। वही स्वास्थ्य विभाग की टीम की भी मेला ड्यूटी लगाई गई है। पचमढ़ी पिछले 3 दिनों से काफी तेज बारिश हो रही है।

 केसरिया केसरिया विशेष संवाददाता खबर

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Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।