सिंधिया के राजनीतिक भविष्य की ज्योति क्या भाजपा में ?

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सिंधिया के राजनीतिक भविष्य की ज्योति क्या भाजपा में ?

भोपाल ,मंगलवार 20 अगस्त 2019

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग करने वाले पुनर्गठन विधेयक का समर्थन कर चर्चा में आये। सिंधिया के राजनीतिक भविष्य को लेकर इन दिनों चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीति के जानकारों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में हार के बाद से सिंधिया काफी बेचैन है। और कांग्रेस पार्टी में भी वह हाशिये पर चल रहे हैं।

सिंधिया के राजनीतिक भविष्य की ज्योति क्या भाजपा में ?

ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा चुनाव हारने के बाद से ही सिंधिया समर्थक विधायक उन्हें प्रदेश की सत्ता के सिंहासन पर मुख्यमंत्री पद पर बैठाने की मांग समय – समय पर उठाते आये है। लेकिन उनकी इस मांग पर कभी भी दिल्ली हाईकमान ने महत्व नही दिया है। लेकिन सिंधिया के 370 पर मोदी सरकार के पक्ष में बयान देने और भाजपा नेताओं के साथ मेल मुलाकात से उनके भाजपा में जाने की चर्चा भी इस समय काफी गर्म है। ग्वालियर चंबल संभाग के एक पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने तो पार्टी के आला नेताओं को उन्हें पार्टी में शामिल नहीं करने एक लेटर तक लिख दिया जो कि सोशल मीडिया पर वायरल तक हो चुका है। बहरहाल राजनीतिक पंडितो के मुताबिक सिंधिया भाजपा में तभी जायेंगे की जब पार्टी उन्हें मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाती है।

 अब सवाल यह उठता है कि यदि भारतीय जनता पार्टी ज्योतिराज सिंधिया को भाजपा में शामिल कराकर मध्य प्रदेश का सीएम प्रोजेक्ट कर देती है या बहुमत के आधार पर उन्हें सीएम बना देती है जिसकी संभावनाएं ज़्यादा नही हैं,तो क्या यह फैसला भारतीय जनता पार्टी में सर्व स्वीकार होगा?

क्योंकि BJP में ख़ासकर मध्य प्रदेश में आज भी भारी-भरकम नेताओं की कमी नहीं है । साथ ही में भारतीय जनता पार्टी मजबूत विपक्ष के रूप में मध्यप्रदेश में इस वक्त कार्य कर रही है। विगत 15 वर्षों की सरकार में साढे 13 वर्षों तक शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहे और आज शिवराज सिंह चौहान देश के शीर्ष नेताओं में गिने जाते हैं । मध्य प्रदेश की राजनीति में और खासकर मप्र भाजपा में उनका कद सबसे ऊंचा है। सिंधिया की दादी उनकी बुआ भले ही भारतीय जनता पार्टी मैं रही हैं या हैं, लेकिन उनके पिता माधवराव सिंधिया ने कॉन्ग्रेस का साथ दिया और आखरी समय में भी वह कांग्रेस के ही साथ थे, भावनात्मक रूप से ज्योतिरादित्य अपने पिता के कार्यों को हमेशा याद दिलाते रहे हैं एवं एवं उनके आदर्शों पर चलने की बात करते रहे हैं ।

अब बदलाव का ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो वक्त तय करेगा लेकिन एक बात जो स्पष्ट है वो ये है कि,पावर पॉलिटिक्स के खेल में आखिर में नुकसान कांग्रेस के हिस्से में आने की अधिक संभावनाएं हैं क्योंकि देश मे और मध्यप्रदेश में आज भी कांग्रेस की कमान युवाओं के पास में नहीं है जिसकी बात पिछले कुछ वर्षों से लगातार की जा रही थी और अब जब कांग्रेस पार्टी में भी राहुल के इस्तीफा देने के बाद एक बार फिर सोनिया गांधी के पास कमान वापस आ गई है और अब ऐसे में मध्यप्रदेश में यदि युवा चेहरा सिंधिया को कांग्रेस दबाव में आकर मुख्यमंत्री बनाने का सोचती भी है तो फिर निश्चित ही मध्यप्रदेश में चुनाव की स्थिति निर्मित हो जाएगी क्योंकि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ इसके लिए तैयार नही होंगे, यदि ऐसा होना होता तो चुनाव परिणाम आने के बाद शुरुआत में ही ये फैसला ले लिया जाता।

By टीम केसरिया

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Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।