यूरोपीय यूनियन ने विदेशी निवेश पर नज़र रखने के लिए एक नए तंत्र की शुरुआत की है. इसकी प्रमुख वजह यूरोप के बाज़ार में चीन की लगातार बढ़ती दखल को समझा जा रहा है.
इस नए तंत्र के अंतर्गत यूरोपीय संघ का एक प्रमुख हिस्सा यूरोपीय कमीशन यह अधिकार प्राप्त करता है कि वह यूरोपीय संघ के साथ होने वाले विदेशी निवेश पर अपनी राय रख सके. ख़ासतौर पर तब जबकि कोई विदेशी निवेश यूरोपीय संघ के किसी सदस्य देश या व्यवस्था के लिए मुश्किलें खड़ी करता हुआ दिखे.
मार्च महीने में इसी यूरोपीयन कमीशन ने चीन को अपना एक रणनीतिक प्रतिद्वंदी बताया.
वहीं यूरोपीय संघ में चीनी राजदूत ने अपील की कि वे चीन के साथ किसी तरह के भेदभाव वाला रवैया ना अपनाएं और उनके लिए अपने रास्ते खोलें.
यूरोपीय संघ में कितना विदेशी निवेश?
ऊपरी तौर पर देखें तो यूरोपीय संघ में चीन का व्यापार बहुत अधिक नहीं है लेकिन बीते एक दशक में इसमें तेज़ी से वृद्धि हुई है.
यूरोपीयन कमिशन की मार्च में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय संघ के ट्रेड ब्लॉक की कुल संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा विदेशी और गैर यूरोपीय संघ देशों के हाथों में है.
इन विदेशी कंपनियों में 9.5 प्रतिशत का मालिकाना हक़ चीन, हॉन्गकॉन्ग और मकाओ के पास है. यह आंकड़ा साल 2007 में 2.5 प्रतिशत था.
वहीं इसके मुक़ाबले साल 2016 के अंत तक अमरीका और कनाडा की कंपनियों की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत रही. जो कि असल में साल 2007 में 42 प्रतिशत के करीब थी.
इस तरह देखा जा सकता है कि बीते कुछ सालों में यूरोपीय संघ में चीनी कंपनियों का प्रभुत्व तेज़ी से बढा है.
यूरोपीय संघ में चीन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तेज़ी से बढ़ा है. यह साल 2016 में सबसे ऊंचे स्तर पर 37.2 बिलियन यूरो पहुंच गया था.
हालांकि इसके बाद इसमें कुछ गिरावट देखने को मिली. यूरोपीय संघ के बाहर के यूरोपीय देशों मे भी साल 2018 में चीनी निवेश में गिरावट आई है.

चीन कहां और क्या निवेश कर रहा है?
चीन का प्रत्यक्ष निवेश सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रहा है. रोडियम ग्रुप और मरकेटर इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार चीन का प्रमुख केंद्र ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी रहे हैं.
बीते साल ब्लूमबर्ग के एक विश्लेषण के अनुसार यूरोप के चार एयरपोर्ट, छह बंदरगाहों और 13 प्रोफेशनल फ़ुटबॉल टीमों के शेयर चीन के पास हैं.
एक अनुमान के अनुसार साल 2008 से अभी तक 30 यूरोपीय देशों में चीन की निवेशी गतिविधियां अमरिका के मुक़ाबले 45 प्रतिशत अधिक रहीं.

आधारभूत ढांचा?
मार्च में इटली यूरोप का पहला बड़ा देश था जो चीन के न्यू सिल्क रोड परियोजना में शामिल हुआ.
इसक परियोजना के तहत एशिया और यूरोपीय बाज़ाप में चीन के साथ एक बड़ा व्यापार सम्मिलित है.
आधिकारिक तौर पर इस परियोजना में यूरोप के 20 से अधिक देश शामिल हैं. इसमें रूस भी शामिल है.
उदाहरण के लिए ग्रीस में चीन ने पिराएस बंदरगाह को बढ़ाने का खर्च उठाया है. वहीं चीन सर्बिया, मोंटेग्रो, बोस्निया-हर्ज़ेगोविना और नॉर्थ मैसिडोनिया में सड़क और रेल निर्माण का काम संभाल हुआ है.
चीन के इन निवेशों के चलते दक्षिणी यूरोप में मौजूद कुछ गरीब देश भी चीन के प्रति आकर्षित हुए हैं.
हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि चीनी ऋण कई तरह की शर्तों के साथ मिलता है. इसमें चीन की कंपनियां भी शामिल होती हैं और इन देशों पर चीन का कर्ज़ बढ़ने का ख़तरा भी बना रहता है.

क्या चीनी निवेश बढ़ेगा?
एक दशक से अधिक के विस्तार के बाद वैश्विक स्तर पर चीन का बाहरी प्रत्यक्ष निवेश पिछले एक या दो वर्षों में धीमा पड़ा है.
रोदियम ग्रुप के अगाथा क्रेट्ज कहते हैं, “यह मुख्य रूप से न सिर्फ चीन से पूंजी के बाहर जाने पर लगे नियंत्रण का नतीजा है बल्कि वैश्विक स्तर पर बदलते राजनीतिक माहौल का भी.”
अमरीकी प्रशासन चीन की आर्थिक गतिविधियों की दिशा में एक सख्त कदम उठा रहा है.
सरकारें अधिक सतर्क होती हैं ख़ासकर जब अर्थव्यवस्था के संवेदनशीन क्षेत्र जैसे दूरसंचार और रक्षा में निवेश की बात आती है.
लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीन अब यूरोप में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है, चाहे वो प्रत्यक्ष निवेश के माध्यम से हो या नए सिल्क रोड प्रोजेक्ट के माध्यम से.
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Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

