लोकसभा चुनाव 2019: EVM खराब होने पर क्या किया जाना चाहिए?

सिन्धुवासिनी
केसरिया संवाददाता


“भारत में ईवीएम या तो ख़राब हो रही हैं या फिर बीजेपी को वोट दे रही हैं. ज़िलाधिकारियों का कहना है कि चुनाव अधिकारी मशीनें चलाने के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं. ये उस मतदान प्रक्रिया की आपराधिक नज़रअंदाज़ी है जिसमें 50,000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. 350 से ज़्यादा मशीनें बदली जा रही हैं. क्या हमें ज़िलाधिकारियों का भरोसा करना चाहिए या आगे इससे भी ज़्यादा षडयंत्रकारी कुछ होने वाला है?”

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ये ट्वीट मंगलवार को किया था. ये ट्वीट उन्होंने भारतीय निर्वाचन आयोग के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को टैग करते हुए किया था.

ट्विटर पोस्ट @yadavakhilesh: EVMs across India malfunctioning or voting for the BJP. DMs say poll officials untrained to operate EVMs. 350+ being replaced. This is criminal negligence for a polling exercise that costs 50,000 crs.Should we believe DMs @ECISVEEP,  or is something far more sinister afoot?

मंगलवार यानी 23 अप्रैल को देश में लोकसभा के तीसरे चरण के चुनाव हुए थे. इसमें उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फ़िरोज़ाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली और पीलीभीत सीटों पर मतदान किया गया.

अखिलेश यादव के ट्वीट के साथ कुछ ख़बरों के स्क्रीनशॉट पोस्ट किए गए थे जिनमें देश के अलग-अलग हिस्सों से ईवीएम ख़राब होने की ख़बरें थीं.

दरअसल वोटिंग शुरू होते ही रामपुर के कई मतदान केंद्रों से ईवीएम खराब होने की ख़बरें आईं थीं. शुरुआत में स्थानीय मीडिया में ऐसी रिपोर्ट्स आईं की रामपुर में 300 से ज़्यादा वोटिंग मशीनें काम नहीं कर रही हैं.

हालांकि रामपुर के ज़िलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने बीबीसी से बातचीत में 300 मशीनें ख़राब होने के दावे का खंडन किया.

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ट्विटर पोस्ट @ceoup: ट्वीट के माध्यम से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा आरोप लगाया गया कि ई वी एम खराब है अथवा बी जे पी के लिये वोट डाले जा रहे है। उक्त प्रकरण में जिले से इस प्रकार की शिकायत की पुष्टि नही की गयी है।#DeshKaMahaTyohar  #LokSabhaElections2019  @ECISVEEP

उन्होंने कहा, “मॉक पोल के पहले पांच जगहों पर ईवीएम में दिक्कत आई थी और मॉक पोल के तुरंत बाद आठ जगहों पर. सुबह 11 बजे तक हमारे ज़िले में 18 बैलट यूनिट और 19 कंट्रोल यूनिट में परेशानी आई. वोटिंग के दौरान दिनभर में कुल मिलाकर 62 वीवीपैट (Voter Verifiable Paper Audit Trail)में दिक्कत आई थी जो पूरी तरह सामान्य है.”

आंजनेय कुमार ने कहा, “अगर वाक़ई इतनी बड़ी संख्या में ईवीएम खराब होतीं तो ज़िले में दोपहर तक का मतदान प्रतिशत बहुतकम होता लेकिन ऐसा नहीं हुआ.”

वो ईवीएम पर उठते सवालों पर पूरी तरह राजनीतिक बताते हैं.

ट्विटर पोस्ट @DeoRampur: जनपद रामपुर में मतदान सकुशल एवं शांतिपूर्वक तरीके से चल रहा है, EVM मशीनें ख़राब एवं वोटरों को धमकाने के सम्बन्ध में फैलाई जा रही अफवाहें एवं भ्रान्तिया मिथ्या एवं गलत है, क्रपया इस प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दिया जाए !!

उन्होंने कहा, “अगर किसी की मंशा ही ईवीएम को निशाना बनाने की है तो इस पर कुछ नहीं कहा जा सकत. ईवीएम और पूरी चुनावी प्रक्रिया के लिए हमारी लगातार ट्रेनिंग होती है. मैं ख़ुद हर ट्रेनिंग में मौजूद रहा हूं और दावे से कह सकता हूं इसमें किसी तरह की लापरवाही की गुंज़ाइश नहीं होती.”

आंजनेय कुमार ने बीबीसी से कहा, “वोटिंग से पहले हम लोगों के बीच जाकर समझाते हैं कि ईवीएम कितने पारदर्शी तरीके से काम करती है. हम मतदान से तक़रीबन डेढ़ महीने पहले सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को बुलाकर उनके सामने ईवीएम से वोटिंग का डेमो देते हैं और एक-एक चीज़ समझाते हैं. हम बूथ स्तर पर जाकर लोगों को भी ईवीएम के बारे में समझाते हैं. ये बात और है कि इस वक़्त कई राजनीतिक पार्टियां, नेता और उम्मीदवार किन्हीं वजहों से हमारे पास नहीं आते और चीज़ें नहीं देखते-समझते.”

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ईवीएम

आंजनेय कुमार कहते हैं कि राजनीतिक पार्टियों और नेताओं का ईवीएम पर दोष मढ़ना दुर्भाग्यपूर्ण है.

अब सवाल ये है कि ईवीएम में किस तरह की खराबी आती है और कैसे?

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बीबीसी से इस बारे में तफ़्सील से बात की.

उन्होंने बताया कि कई बार ईवीएम और वीवीपैट को जोड़ने वाले केबल पर किसी का पैर या कोई और चीज़ पड़ जाए तो मशीन में ‘लिंक एरर’ दिखने लगता है. जब मशीन में किसी भी तरह की खराबी आने पर वीवीपैट से पर्ची निकलनी बंद हो जाती है.

कई बार मशीन को दूर-दराज़ के इलाकों में ले जाने के दौरान भी कुछ तकनीकी गड़बड़ी आ जाती है. कई बार मशीन की बैट्री को बदलने में देर हो जाती ह, जिसकी वजह से गड़बड़ी होने लगती है.

इसके अलावा वीवीपैट सूरज की रोशनी और पानी को लेकर बहुत संवेदनशील होता है. ऐसे में इसके पानी या धूप के ज़्यादा देर संपर्क में आने से भी ईवीएम में खराबी आने की आशंका होती है.

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भारतीय महिला वोटर

ईवीएम खराब होने पर क्या किया जाना चाहिए?

-चुनाव आयोग के प्रावधानों के अनुसार वोटिंग के दौरान ईवीएम में किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता चलते ही उसे तुरंत बदला जाना चाहिए.

इस मद्देनज़र चुनाव आयोग के अधिकारी अलग-अलग पोलिंग बूथ पर अतिरिक्त मशीनों के साथ घूमा करते हैं. निर्वाचन आयोग के क़ायदे के मुताबिक़, एक ज़िले के लिए जितनी वोटिंग मशीनें दी जाती हैं उसकी 10 फ़ीसदी ईवीएम रिज़र्व रखी जाती हैं ताकि ज़रूरत पड़ने पर उन्हें इस्तेमाल किया जा सके.

-ईवीएम में तीन यूनिट होती हैं- कंट्रोल यूनिट, बैलट यूनिट और वीवीपैट. अगर वोटिंग के दौरान कंट्रोल और बैलट यूनिट में कोई दिक्कत आती है तो तीनों यूनिट बदली जाती हैं. तीनों यूनिट बदलने के बाद फिर से मॉक पोल किया जाता है.

-मॉक पोल के दौरान सम्बन्धित पार्टियों के पोलिंग एजेंट्स की मौजूदगी में कम से कम 50 वोट डालकर दिखाते हैं कि मशीन ठीक तरीके से काम कर रही है. यूनिट बदलने से लेकर मॉक पोल तक की प्रक्रिया में कम से कम आधे घंटे का वक़्त लगता है.

-ईवीएम वीवीपैट मैनुअल के मुताबिक़ मतदान से तक़रीबन एक घंटे पहले मॉक पोल भी किया जाता है.

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ईवीएम

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर बीबीसी से कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान देश में तक़रीबन एक करोड़ चुनावकर्मी स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान कराने की कोशिशों में जुटे रहते हैं.

उन्होंने कहा, “भारत के चुनावों में, ख़ासकर लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग के कर्मचारी भारी दबाव और जिम्मेदारी के साथ काम करते हैं. ऐसे में मशीनी गड़बड़ी, मानवीय भूल और कुछ लापरहवाही ज़रूर हो सकती है लेकिन किसी तरह की साज़िश किसी क़ीमत पर नहीं.”

पिछले कुछ सालों में कई राजनीतिक पार्टियों और तबकों ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. कुछ जगहों पर ईवीएम हैक किए जाने के दावे भी किए गए और मशीन के बजाय बैलट पेपर से मतदान कराने की मांग की गई.

हालांकि भारतीय निर्वाचन आयोग इन सभी आरोपों को ख़ारिज करते हुए बैलट पेपर से चुनाव की मांग ठुकरा चुका है.

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Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।