EXCLUSIVE | दिग्विजय सरकार में नक्सली हिंसा का काला अध्याय
बालाघाट में कांग्रेस मंत्री लिखीराम कावरे की निर्मम हत्या — पूरा सच
स्थान: बालाघाट, मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह

की कांग्रेस सरकार के दौरान नक्सली हिंसा की एक ऐसी घटना सामने आई थी,
जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
15–16 दिसंबर 1999 की दरमियानी रात बालाघाट जिले में तत्कालीन कांग्रेस नेता
और परिवहन मंत्री लिखीराम कावरे की 
नक्सलियों द्वारा निर्मम हत्या कर दी गई।
क्या थी पूरी घटना?
बालाघाट जिले के सोनपुरी (सोनपुर) गांव में नक्सलियों ने मंत्री लिखीराम कावरे के घर पर हमला किया।
उन्हें घर से बाहर निकाला गया और धारदार हथियारों से बेहद क्रूर तरीके से हत्या कर दी गई।
घटना के बाद पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई और यह मामला राज्य सरकार के लिए
एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गया।
नक्सलियों का मकसद
सुरक्षा एजेंसियों और जांच रिपोर्टों के अनुसार,
यह हत्या नक्सलियों द्वारा बदले की कार्रवाई के रूप में की गई थी।
बताया गया कि कुछ समय पहले हुए एक नक्सली एनकाउंटर के बाद
नक्सलियों ने इस घटना को अंजाम दिया।
उस समय बालाघाट जिला नक्सल प्रभावित सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल था।
जांच और कोर्ट की पूरी टाइमलाइन
- मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपी गई।
- वर्ष 2000 में CBI ने इस केस में चार्जशीट दाखिल की।
- निचली अदालत ने कुछ आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
- मार्च 2019 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला इसलिए भी बेहद अहम माना जाता है क्योंकि
यह मध्यप्रदेश में नक्सली हिंसा में मारे गए एकमात्र कैबिनेट मंत्री की घटना थी।
साथ ही इसे दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी
कानून-व्यवस्था संबंधी विफलताओं में गिना जाता है।
निष्कर्ष
बालाघाट में लिखीराम कावरे की हत्या केवल एक राजनीतिक हत्या नहीं थी,
बल्कि यह घटना राज्य की नक्सल नीति, सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक तैयारी की
कठिन परीक्षा बन गई थी।
आज भी यह मामला नक्सलवाद और राजनीतिक जवाबदेही पर
गंभीर सवाल खड़े करता है।
🔍 FACT vs CLAIM मध्यप्रदेश में नक्सलवाद
| बिंदु | सरकारी दावा (Claim) | तथ्यात्मक आकलन (Fact-Check) |
|---|---|---|
| नक्सल स्थिति | मध्यप्रदेश पूरी तरह नक्सलवाद-मुक्त | संगठित नक्सली नेटवर्क सक्रिय नहीं |
| प्रभावित जिले | कोई जिला नक्सल प्रभावित नहीं | पूर्व प्रभावित जिलों में बड़े हमले नहीं |
| नक्सली संगठन | राज्य में मौजूदगी समाप्त | कमांड स्ट्रक्चर समाप्त, नेटवर्क बिखरा |
| हिंसक घटनाएं | शून्य | हाल के वर्षों में कोई बड़ी घटना दर्ज नहीं |
| सुरक्षा स्थिति | सामान्य | सीमावर्ती जंगल क्षेत्रों में सतर्क निगरानी |
| आधिकारिक रुख | नक्सल समस्या समाप्त | एहतियाती सुरक्षा उपाय जारी |
Disclaimer: यह तालिका सरकारी बयानों, सार्वजनिक रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।
सुरक्षा कारणों से सभी ऑपरेशनल विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाते।
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Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।
