MP High Court: अजय श्रीवास्तव को बड़ी राहत, ENC पद पर लगी रोक हटी; कोर्ट ने चयन प्रक्रिया को माना ‘निष्पक्ष और पारदर्शी’
इंदौर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) की इंदौर खंडपीठ ने एक अहम फैसला सुनाते हुए भवन विकास निगम के प्रमुख अभियंता (ENC) पद को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में अजय श्रीवास्तव के पक्ष में फैसला दिया है। कोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 को लगाए गए स्थगन आदेश (Stay Order) को हटाते हुए अजय श्रीवास्तव को ईएनसी (ENC) के पद पर यथावत कार्य करने की अनुमति प्रदान कर दी है।
यह निर्णय न केवल अजय श्रीवास्तव के लिए व्यक्तिगत राहत है, बल्कि इसे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और चयन प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, भवन विकास निगम में प्रमुख अभियंता (Engineer-in-Chief) के पद पर अजय श्रीवास्तव की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी। इस मामले में याचिकाकर्ता भूपेंद्र सिंह ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद कोर्ट ने 8 दिसंबर को नियुक्ति पर अस्थायी रोक लगा दी थी।
हालांकि, ताजा सुनवाई में भवन विकास निगम और अजय श्रीवास्तव 
की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने कोर्ट के सामने पक्ष रखते हुए यह साबित किया कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के दायरे में रहकर की गई थी।
कोर्ट में रखे गए तथ्य: ‘मेरिट के आधार पर हुआ चयन’
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने चयन प्रक्रिया की पूरी फाइल और दस्तावेज रखे गए। न्यायालय ने तथ्यों की जांच के बाद पाया कि:
- विज्ञापन और आवेदन: ईएनसी पद के लिए बाकायदा विज्ञापन जारी किया गया था।
- स्क्रीनिंग: कुल 7 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से दस्तावेजों के सत्यापन (Document Verification) के बाद केवल 4 अभ्यर्थी पात्र (Eligible) पाए गए।
- साक्षात्कार: एक उच्चस्तरीय साक्षात्कार समिति (High-Level Interview Committee) का गठन किया गया था।
- परिणाम: इस समिति द्वारा आयोजित इंटरव्यू और मेरिट लिस्ट में अजय श्रीवास्तव ने सर्वाधिक अंक प्राप्त किए थे, जिसके आधार पर उनका चयन हुआ।
याचिकाकर्ता क्यों हुए बाहर?
फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता भूपेंद्र सिंह ने भी इस पद के लिए आवेदन किया था। हालांकि, ‘नियम पुस्तिका’ (Rule Book) की शर्तों और मापदंडों पर खरे न उतरने के कारण उन्हें चयन प्रक्रिया के दौरान ही ‘अपात्र’ घोषित कर दिया गया था। कोर्ट ने माना कि जब उम्मीदवार स्वयं नियमों के तहत पात्र नहीं है, तो चयन प्रक्रिया को चुनौती देने का आधार कमजोर हो जाता है।
फैसले का प्रशासनिक महत्व
कोर्ट के इस आदेश के बाद अब अजय श्रीवास्तव अपने पद पर वापस लौटेंगे और ईएनसी के रूप में कामकाज संभालेंगे। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से विभाग में स्थिरता आएगी। बड़े पदों पर लंबी कानूनी लड़ाई अक्सर विभागीय कामकाज और निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) को प्रभावित करती है। रोक हटने से भवन विकास निगम की लंबित परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- फैसला: इंदौर हाईकोर्ट ने अजय श्रीवास्तव के ईएनसी पद पर लगी रोक हटाई।
- वजह: चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुकूल पाया गया।
- प्रतिस्पर्धा: 7 आवेदकों में से 4 चुने गए थे, अजय श्रीवास्तव मेरिट में सबसे ऊपर थे।
- याचिकाकर्ता: भूपेंद्र सिंह नियमों के तहत अपात्र होने के कारण रेस से बाहर हुए।
(यह खबर अपडेट की जा रही है )
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Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।
