मोहन यादव की तत्परता बनाम अन्य राज्यों की लापरवाही: कफ सिरप कांड में मिसाल
कफ सिरप मौतें: मोहन यादव ने अन्य मुख्यमंत्रियों से बेहतर संभाला संकट
जम्मू-राजस्थान में न्याय की प्रतीक्षा, मध्य प्रदेश में त्वरित न्याय: यादव की संवेदनशीलता
आपातकाल में मोहन यादव का मजबूत नेतृत्व: बाकी राज्यों से सीखें
मोहन यादव की संवेदनशीलता ने कफ सिरप कांड में बचाई मध्य प्रदेश की लाज…
05/अक्टूबर/2025… शैलेन्द्र मिश्रा शैली – 9425030127
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप से बच्चों की मौतों का मामला सामने आने के बाद पूरे राज्य में सनसनी फैल गई। सितंबर 2025 से शुरू हुआ यह दुखद सिलसिला परासिया अनुमंडल में तब गहराया, जब सर्दी-खांसी के इलाज के लिए दी गई कोल्ड्रिफ कफ सिरप ने मासूमों की जान लेना शुरू किया। बच्चों में उल्टी, पेट दर्द, बेहोशी और किडनी फेलियर जैसे लक्षण दिखे। जांच में सिरप में डायथिलीन ग्लाइकोल (DEG) जैसे जहरीले रसायन (48.6%) पाए गए, जो किडनी को नष्ट करने के लिए जिम्मेदार थे। 7 सितंबर से 4 अक्टूबर तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी थी, जिनमें ज्यादातर 5 साल से कम उम्र के थे।
भोपाल की ICMR और पुणे की वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट की जांच ने सिरप को मौत का कारण पाया। तमिलनाडु की एम/एस स्रेसन फार्मा द्वारा निर्मित इस सिरप ने कई राज्यों को प्रभावित किया, लेकिन मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित रहा।
स्वास्थ्य विभाग और मंत्री राजेंद्र शुक्ला पर शुरुआत में लापरवाही के गंभीर आरोप लगे। प्रारंभिक जांच में सैंपल को साफ बताकर मामले को दबाने की कोशिश की गई। स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया कि सिरप जिम्मेदार नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार की एडवाइजरी और तमिलनाडु की जांच ने सच्चाई उजागर कर दी। 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न देने की सलाह के बावजूद विभाग की नाकामी सामने आई। इस लापरवाही ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
ऐसे संकट में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी संवेदनशीलता और त्वरित नेतृत्व से न सिर्फ अपने निकम्मे मंत्रिमंडल की लापरवाही को ढका, बल्कि पूरे तंत्र की लाज बचाई। 4 अक्टूबर को उन्होंने कोल्ड्रिफ सिरप और कंपनी के सभी उत्पादों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया। स्टेट लेवल जांच कमेटी गठित की, सिरप लिखने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कराया और दोषियों को कड़ी सजा का वादा किया। पीड़ित परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा और अस्पताल में भर्ती बच्चों के मुफ्त इलाज की घोषणा की। राज्यव्यापी छापेमारी में सिरप के स्टॉक जब्त किए गए। यादव ने सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, “यह हृदयविदारक है, लेकिन दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
इसकी तुलना अन्य राज्यों से करें तो मोहन यादव का नेतृत्व कहीं अधिक गंभीर और त्वरित नजर आता है। उदाहरणस्वरूप, 2019-20 में जम्मू के उद्हमपुर में कफ सिरप से 12 बच्चों की मौत हुई, जहां DEG की उच्च मात्रा पाई गई, लेकिन स्थानीय सरकार की जांच लंबी चली और न्याय में वर्षों लग गए। माता-पिता आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि जिम्मेदारों पर कार्रवाई धीमी रही। इसी तरह, राजस्थान में हाल के मामलों में दो मौतों के बाद जांच कमेटी गठित की गई, लेकिन तत्काल गिरफ्तारी या मुआवजा जैसी कदम नहीं उठे। उत्तर प्रदेश में 2022 के मरियन बायोटेक मामले में लाइसेंस रद्द हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से प्रत्यक्ष त्वरित हस्तक्षेप की कोई खबर नहीं। अन्य
मुख्यमंत्रियों की तुलना में मोहन यादव ने आपात स्थितियों को बड़ी गंभीरता से संभाला, वरना मौतों की संख्या और बढ़ सकती थी। यह पहली बार नहीं है जब यादव ने संवेदनशीलता दिखाई। इससे पहले PWD, शिक्षा और राजस्व विभागों में मंत्रियों की नाकामी को भी उन्होंने अपनी त्वरित कार्रवाई से संभाला। उनकी इस तत्परता ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर पर्दा डाला, बल्कि जनता का विश्वास भी जीता। कफ सिरप कांड ने दवा उद्योग की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, लेकिन मोहन यादव ने साबित किया कि संवेदनशील नेतृत्व संकट को अवसर में बदल सकता है। केंद्र की CDSCO जांच जारी है, लेकिन मध्य प्रदेश ने संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की मिसाल कायम की।
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Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।
