Demo

पन्ना हीरा को मिला GI टैग: विश्व मंच पर दमकेगी पन्ना की पहचान

पन्ना हीरा को मिला GI टैग: विश्व मंच पर दमकेगी पन्ना की पहचान

रिपोर्ट – सचिन कुमार मिश्रा |
स्थान – पन्ना, मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है। विश्वप्रसिद्ध “पन्ना हीरा” को भारतीय जी.आई. रजिस्ट्री ने आधिकारिक रूप से Geographical Indication (GI) Tag प्रदान कर दिया है। यह मान्यता पन्ना की सदियों पुरानी हीरा परंपरा, उसकी विशिष्ट गुणवत्ता और भौगोलिक पहचान का सबसे बड़ा प्रमाण है।

पन्ना हीरा (प्रतीकात्मक छवि)
प्रतीकात्मक छवि: पन्ना हीरा और खदान — स्थानीय

Demo
परंपरा व भूगर्भीय पहचान का प्रतीक।

कैसे मिला GI टैग?

पन्ना के “डायमंड ब्रांच” द्वारा 07 जून 2023 को प्रस्तुत किए गए विस्तृत आवेदन, वैज्ञानिक दस्तावेज़ों, ऐतिहासिक शोध और भौगोलिक प्रमाणों की समीक्षा के बाद पन्ना डायमंड को Class 14 – Natural Goods के तहत GI टैग प्रदान किया गया। यह उपलब्धि क्षेत्र की प्रशासनिक तैयारी, सटीक दस्तावेज़ीकरण और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

क्यों दुनिया में अद्वितीय है पन्ना का हीरा?

  • प्राकृतिक पारदर्शिता
  • उच्च गुणवत्ता
  • दुर्लभ भूगर्भीय संरचना
  • ऐतिहासिक विरासत
  • सदियों पुरानी पारंपरिक खनन तकनीक

स्थानीय समुदायों द्वारा पीढ़ियों से निभाई जा रही यह परंपरा आज GI मान्यता के रूप में सम्मानित हुई है।

GI टैग से पन्ना को मिलने वाले बड़े लाभ

  1. कानूनी सुरक्षा
    अब “Panna Diamond” नाम का उपयोग केवल पन्ना क्षेत्र से निकाले गए असली हीरों के लिए ही किया जा सकेगा—फर्जी बिक्री पर सख्त कार्रवाई संभव होगी।
  2. अंतरराष्ट्रीय ब्रांड वैल्यू में बढ़ोतरी
    GI टैग के बाद पन्ना हीरा वैश्विक बाजार में और अधिक विश्वसनीय, प्रीमियम और प्रतिस्पर्धी उत्पाद बन गया है।
  3. स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल
    खदानों से जुड़े खनिकों, कारीगरों और व्यापारियों को बेहतर दाम, अधिक रोजगार और नए अवसर मिलेंगे।
  4. पर्यटन और निवेश में बढ़ोतरी
    पन्ना जिला “प्राकृतिक धरोहर केंद्र” के रूप में अधिक आकर्षक बनकर घरेलू व विदेशी पर्यटन और निवेश को आकर्षित करेगा।
  5. पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण
    स्थानीय खनन परंपराएँ और विशेषज्ञता आधिकारिक रूप से संरक्षित होंगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों तक इनका संरक्षण सुनिश्चित होगा।

प्रशासन की अहम भूमिका

GI टैग के लिए दस्तावेज़ीकरण से लेकर तकनीकी प्रमाणों तक—कलेक्टोरेट डायमंड ब्रांच, विभागीय अधिकारी, स्थानीय विशेषज्ञ और समुदाय सभी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी मेहनत ने पन्ना की अमूल्य धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

पन्ना में जश्न का माहौल

पन्ना जिला कलेक्टर ऊषा परमार और खनिज अधिकारी रवि पटेल ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जिलेवासियों, स्थानीय समुदायों और मध्यप्रदेश नागरिकों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने इसे “पन्ना की ऐतिहासिक विरासत को मिला सर्वोच्च सम्मान” बताया।

निष्कर्ष

“Panna Diamond” का GI टैग प्राप्त करना सिर्फ एक प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि पन्ना की धरती, उसकी परंपरा, वहां के लोगों और मध्यप्रदेश की गौरवशाली पहचान का राष्ट्रीय सम्मान है। यह उपलब्धि पन्ना को वैश्विक नक्शे पर और अधिक चमकदार बनाएगी।

 

kesarianews
Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।