जनगणना 2027: 40 सवालों में दर्ज होगी बदलते भारत की तस्वीर..

🇮🇳 जनगणना 2027: आजादी के 79 साल बाद भारत खुद को आंकड़ों में कैसे दर्ज करेगा?

नई दिल्ली। आज 15 अगस्त है—देश अपनी आजादी के 79 वर्ष पूरे कर 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इसी दौर में भारत अपनी अगली जनगणना की तैयारी कर रहा है। ऐसे में Census 2027 को केवल आबादी की गिनती की प्रक्रिया के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा; यह यह दर्ज करने की कोशिश भी होगी कि आजादी के बाद करीब आठ दशकों में भारत का समाज, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और डिजिटल जीवन कितना बदल चुका है।

गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय ने जनगणना 2027 के Population Enumeration (जनसंख्या गणना) चरण के लिए प्रश्नावली अधिसूचित की है। इस चरण में निर्धारित प्रश्नों के माध्यम से देश की आबादी से संबंधित विस्तृत सामाजिक और आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी।

अधिसूचित प्रश्नावली में व्यक्ति की पहचान और पारिवारिक स्थिति से लेकर धर्म, जाति, शिक्षा, रोजगार, प्रवास, डिजिटल साक्षरता, बैंक खाते, मोबाइल और कुछ पहचान दस्तावेजों तक से संबंधित जानकारी शामिल है। कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ा सवाल भी इसमें रखा गया है।

जाति की जानकारी सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में

प्रश्नावली में SC/ST/Caste से संबंधित सवाल शामिल किया गया है। यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की स्थिति के साथ व्यक्ति की जाति संबंधी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वतंत्रता के बाद नियमित जनगणना में सभी जातियों की व्यापक गणना नहीं की गई थी; SC और ST संबंधी आंकड़े पहले से जनगणना का हिस्सा रहे हैं। Census 2027 में जाति संबंधी जानकारी को व्यापक रूप से दर्ज करने का फैसला सामाजिक और नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

सवाल सिर्फ पहचान के नहीं, जीवन की पूरी तस्वीर के हैं

प्रश्नावली में व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, आयु, वैवाहिक स्थिति, धर्म, जाति, माता-पिता की जानकारी, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और कार्यस्थल से संबंधित जानकारी शामिल है।

यानी सवाल केवल “कितने लोग हैं?” का जवाब तलाशने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह समझने की कोशिश भी करते हैं कि वे कौन हैं, क्या पढ़ते हैं, क्या काम करते हैं और किस तरह की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में रहते हैं।

आधार, मोबाइल, बैंक खाते और पहचान दस्तावेज

प्रश्नावली के अंतिम हिस्से में मोबाइल नंबर, कुल बैंक खातों की संख्या, आधार, वोटर आईडी, भारतीय पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित जानकारी भी शामिल है।

हालांकि इसे इस तरह पेश करना सही नहीं होगा कि “हर नागरिक को अनिवार्य रूप से अपना आधार नंबर देना होगा।” प्रश्नावली में विभिन्न दस्तावेजों के संबंध में उनकी उपलब्धता या लागू होने की स्थिति पूछी गई है। इसलिए इस विषय पर सोशल मीडिया की अतिरंजित व्याख्याओं से बचना जरूरी है।

कोविड वैक्सीनेशन का सवाल भी

Census 2027 की प्रश्नावली में कोविड-19 टीकाकरण के स्थान से संबंधित सवाल भी शामिल किया गया है।

यह सवाल इस बार की प्रश्नावली में शामिल किए गए विषयों के व्यापक दायरे को दर्शाता है और भविष्य में स्वास्थ्य तथा जनसांख्यिकीय अध्ययन के लिए उपयोगी डेटा उपलब्ध करा सकता है।

असल महत्व 40 सवालों से ज्यादा, उनसे बनने वाले डेटा का है

जनगणना किसी सामान्य सरकारी सर्वे से अलग है। इसके आंकड़े लंबे समय तक नीति निर्माण, संसाधनों के वितरण और विभिन्न योजनाओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस लिहाज से Census 2027 में जाति, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों का एक साथ शामिल होना महत्वपूर्ण है।

लेकिन इसके साथ एक दूसरी जिम्मेदारी भी जुड़ती है—व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी की शुद्धता, सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग।

डेटा जितना व्यापक होगा, उसे सुरक्षित रखने और उसके सही इस्तेमाल को लेकर सार्वजनिक भरोसे की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होगी।

जनगणना 2027 की प्रक्रिया

Census 2027 को दो प्रमुख चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण में House Listing and Housing Census के तहत मकानों और आवासीय परिस्थितियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है। इसके बाद दूसरे चरण में Population Enumeration के दौरान प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित निर्धारित जानकारी दर्ज की जाएगी।

सरकारी कार्यक्रम के अनुसार Population Enumeration फरवरी 2027 में किया जाना है। कुछ गैर-सिंक्रोनस और विशेष क्षेत्रों के लिए प्रक्रिया का समय अलग हो सकता है।

आजादी के 79 साल बाद—एक और तस्वीर

आजादी के समय भारत की बड़ी चुनौतियों में से एक थी—एक विशाल और विविध आबादी को एक राष्ट्र के रूप में संगठित करना।

आज 79 वर्ष बाद चुनौती का स्वरूप अलग है। अब सवाल यह है कि इस बदलते भारत की सही तस्वीर हमारे आंकड़ों में कितनी स्पष्ट दिखाई देती है।

Census 2027 इसी सवाल का एक बड़ा जवाब देने वाला दस्तावेज हो सकता है।

जाति से लेकर शिक्षा तक, रोजगार से लेकर प्रवास तक और डिजिटल साक्षरता से लेकर पहचान से जुड़े सवालों तक—जनगणना के आंकड़ों में भारत के वर्तमान की कई परतें दिखाई देंगी।

आजादी के 79 साल बाद भारत अपने बारे में जो आंकड़े दर्ज करेगा, वे आने वाले वर्षों में यह समझने का आधार बनेंगे कि देश कहां से आया, आज कहां खड़ा है और किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इसलिए Census 2027 को सिर्फ “40 सवालों वाली जनगणना” कहना इसके व्यापक महत्व को सीमित कर देगा। यह बदलते भारत की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को आंकड़ों में दर्ज करने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।


स्रोत: गृह मंत्रालय/भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की अधिसूचनाएं तथा Census 2027 से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज।

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Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।