कोरोना संकट में भुखमरी का शिकार हो रहे हैं अतिथिविद्वान!

अतिथिविद्वानों ने भाजपा अध्यक्ष को पत्र लिखकर फालेन आउट अतिथिविद्वानों की जल्द बहाली व नियमितीकरण की लगाई गुहार

बड़ी खबर केसरिया खबर@sms
17/मई/2020

भोपाल मप्र
केसरिया डेस्क…

कोरोना संकट के दौर में भुखमरी का शिकार हो रहे हैं अतिथिविद्वान!

मध्यप्रदेश की उच्च शिक्षा को बीते दो दशकों से पोषित करने वाले अतिथिविद्वान सरकारी उदासीनता से आज स्वयं बेरोजगारी व भुखमरी के दोराहे पर खड़े हैं।
हाल यह है कि उच्च शिक्षित व अध्यापन का लंबा अनुभव रखने वाले ये महाविद्यालयीन अतिथिविद्वान कोरोना काल के इस संकटकालीन समय मे रोज़ी रोटी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।

कुछ बेरोजगारी के दंश को चुपचाप सहन कर रहे हैं, जबकि कुछ अपने परिवार के भरणपोषण के लिए मजदूरी तक करने को मजबूर हैं।
यह मध्यप्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की आधुनिक तस्वीर है। कांग्रेस सरकार में लगभग 2700 अतिथिविद्वानों को सेवा से फालेन आउट करके बेरोजगार कर दिया था तथा नई सरकार के गठन से इन अतिथिविद्वानों को पुनः नौकरी पर रखे जाने की उम्मीद बढ़ी थी,किन्तु कोरोना संकट के कारण इसमे भी अनावश्यक विलंब हो रहा है।
फलस्वरूप अतिथिविद्वानों के समक्ष जीवन यापन का संकट उत्पन्न हो गया है।
उक्त बातें अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह ने एक लिखित विज्ञप्ति के माध्यम से कही हैं।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को प्रेषित किया गया पत्र

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी आशीष पांडे ने कहा है कि मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा को पत्र लिखकर अतिथिविद्वानों की पीड़ा एवं दुर्दशा से अवगत कराया है।


पत्र में कहा गया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में वचन देने के बाद भी अतिथिविद्वानों के नियमितीकरण के संबंध में कोई प्रयास नही किये बल्कि इससे उलट लगभग 2700 अतिथिविद्वानों को सेवा से फालेन आउट करके बेरोजगार कर दिया था।

फ़ाइल फोटो


फलस्वरूप राजधानी भोपाल में शाहजाहानी पार्क के चर्चित आंदोलन की शुरुआत हुई। जिसमें स्वयं वर्तमान मुख्यमंन्त्री शिवराज सिंह चौहान, गोपाल भार्गव, डॉ नरोत्तम मिश्रा व डॉ सीताशरण शर्मा जैसे अग्रिम पंक्ति के भाजपा नेताओं ने पहुंच कर अतिथिविद्वान नियमितीकरण की मांग का समर्थन किया था। यही नही इसी मुद्दे पर विधानसभा की कार्यवाही तक भाजपा के विरोध के कारण रोकनी पड़ी थी। तथा अतिथिविद्वानों के मुद्दे के कारण ही प्रदेश से कमलनाथ सरकार की विदाई भी हो गई। सरकार तो बदल गयी किन्तु अतिथिविद्वानों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

फालेन आउट अतिथिविद्वानों की अविलंब की जाए बहाली…

अतिथिविद्वान डॉ कुसुम चौधरी और शशांक शर्मा के अनुसार आज भी लगभग 1800 अतिथिविद्वान सेवा से फालेन आउट होकर कोरोना संकट के इन दौर में,घोर आर्थिक विपन्नता के बीच बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं।हाल यह है कि अपने परिवार का भरण पोषण करने अतिथिविद्वान आज मजदूरी तक करने को विवश है।जबकि आर्थिक तंगी व बेरोजगारी से व्यथित होकर कई अतिथिविद्वान आत्महत्या जैसा घातक कदम तक उठा चुके हैं।
जबकि कई अतिथिविद्वान आज अपने अनिश्चित भविष्य और आर्थिक विपन्नता के कारण पैरालिसिस,हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों के चपेट में है।


अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा की ओर से भाजपा के प्रदेश संगठन के मुखिया से यह प्रार्थना की गई है कि अविलंब फालेन आउट अतिथिविद्वानों को उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जल्द सेवा में वापस लिया जाए तथा अतिथिविद्वानों की रुकी हुई नियमितीकरण की प्रक्रिया को एक बार पुनः त्वरित गति से प्रारम्भ किया जाए।
जिससे कोरोना काल के इस संकटकालीन समय मे अतिथिविद्वान भी आर्थिक विपन्नता से दूर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।

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Author: kesarianews

शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।