भोपाल। विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी से कांग्रेस अभी उबर भी नहीं पाई थी कि पार्टी छोड़ने वालों ने मुसीबत और बढ़ा दी है। इससे कांग्रेस के कुछ लोकसभा सीटों पर चुनावी समीकरण बिगड़ गए हैं। जबलपुर से जगत बहादुर सिंह तो सागर लोकसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे को चुनाव लड़ाने की तैयारी थी पर उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली। पार्टी को कुछ और नेताओं के समर्थकों के साथ पाला बदलने की आशंका है, इसलिए प्रत्याशी चयन में सावधानी बरती जा रही है।
लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने समन्वयकों को भेजकर सभी 29 संसदीय क्षेत्रों में रायशुमारी कराई है। इसके आधार पर प्रत्याशी चयन का काम किया जा रहा है पर जिस तरह से बड़े नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, उसने चुनावी समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
दरअसल, पार्टी कुछ महापौर और पूर्व विधायकों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रही थी। इसमें जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू का नाम भी शामिल था। क्षेत्र के चार विधानसभा क्षेत्रों से केवल उनका नाम ही प्रस्तावित किया था पर वे इस माहौल में चुनाव लड़ने के लिए बिल्कुल भी इच्छुक नहीं थे। इसी तरह सागर लोकसभा से पूर्व विधायक और कमल नाथ समर्थक अरुणोदय चौबे का नाम भी प्रस्तावित था। चौबे ने स्वयं भाजपा की सदस्यता लेते हुए यह बात सार्वजनिक की कि उन्हें चुनाव लड़ाया जा रहा था। यही स्थिति इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल के साथ भी थी।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने संभावित प्रत्याशियों की जो सूची तैयार की थी, उसमें कई उन नेताओं के नाम भी थे, जो पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इससे चुनावी समीकरण भी प्रभावित हुए हैं। इसे देखते हुए पार्टी सावधानी बरत रही है।
दरअसल, कुछ अन्य नेताओं के दलबदल करने की आशंका बनी हुई है, इसलिए संबंधित क्षेत्रों के अन्य नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने वरिष्ठ नेताओं से चर्चा भी है। उधर, पार्टी छोड़कर जाने वालों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कहना है कि जो लोग गए हैं, वे सत्ता के भूखे हैं। उनका विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है।
Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।
