उज्जैन: शहर के पास भिड़ावद गांव में अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इसमें कई लोग जमीन पर लेटे और उनके ऊपर से दर्जनों गायों को निकाला गया। लोगों का मानना है कि ऐसा करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और गायों के पैरों के नीचे आने से 33 करोड़ देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।
इस तरह से मनाई जाती है परंपरा
पड़वा के दिन सुबह पूजा-अर्चना की जाती है। फिर ढोल-बाजे के साथ गांव की परिक्रमा की जाती है। इसके बाद गांव की सभी गायों को एक जगह इकट्ठा किया जाता है। दूसरी तरफ जो लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर यह परंपरा निभाते हैं, वे जमीन पर लेट जाते हैं।
ऊपर से गुजरती है गायें
फिर शुरू होती है जान जोखिम में डालने वाली अनोखी परंपरा। जहां लोगों को लेटाया जाता है, वहां गायों को एक साथ छोड़ दिया जाता है। कुछ ही देर में सारी गायें उन्हें अपने पैरों से रौंदती हुई उन पर से गुजर जाती हैं।
सैकड़ों की संख्या में देखने आते हैं लोग
इसके बाद इस परंपरा में शामिल होने वाले लोग उठकर खड़े होते हैं और ढोल की धुन पर नाचने लगते हैं। पूरे गांव में खुशी का माहौल होता है। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए आस-पास के गांवों से भी लोग आते हैं।
इस बार एक दर्जन लोगों ने लिया हिस्सा
इस बार भी यह आयोजन उज्जैन शहर से 75 किलोमीटर दूर बड़नगर तहसील के भिड़ावद गांव में हुआ। इस वर्ष 12 लोग इस परंपरा को निभाने में शामिल हुए। इनके ऊपर से करीब 30 गायों को निकाला गया।
Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।
