अंकारा: तुर्की के 2,600 साल पुराने स्मारक पर खुदे हुए एक प्राचीन क्षतिग्रस्त शिलालेख को समझ लेने का दावा किया गया है। शोधकर्ता मार्क मुन का मानना है कि वह इस प्राचीन शिलालेख वाले स्मारक को समझने में कामयाब हो गए हैं, जिसे अर्सलान काया (शेर की चट्टान) कहा जाता है। इस स्मारक पर शेरों और स्फिंक्स की छवियां उकेरी गई हैं। शोधकर्ता ने इस स्मारक पर रिसर्च के जरिए बताया है कि प्राचीन तुर्की में यानी इस्लाम के आगमन से पहले किस तरह की पूजा पद्धति प्रचलन में थी।
कई संस्कृतियों में मरेटन का सम्मान
मार्क मुन ने कहा, ‘यूनानी लोग उन्हें देवताओं की माता के रूप में जानते थे। रोमन उन्हें मैग्ना मेटर या महान माता कहते थे। इस स्मारक का निर्माण जिस समय में किया गया, उस समय लिडिया नाम से जाना जाने वाला एक राज्य का इस क्षेत्र पर शासन था। वह भी मेटेरन के लिए उच्च सम्मान रखता था। इस स्मारक को मौसम और लूटपाट से भारी क्षति हुई है। ऐसे में इस शिलालेख को पढ़ना कठिन है और लंबे समय से बहस में रहा है।
तुर्की मे इस्लाम से पहले मटेरन की पूजा?
तुर्की के क्षेत्रों में इस्लाम धर्म की शुरुआत 7वीं शताब्दी की शुरुआत में मानी जाती है। वहीं आधुनिक तुर्की के क्षेत्र में इस्लाम की मजबूत उपस्थिति 11वीं शताब्दी में होती है। आज के समय में इस्लाम तुर्की का सबसे बड़ा धर्म है। तुर्की की तकरीबन 99 फीसदी आबादी इस्लाम धर्म के सुन्नी फिरके को मानती है। वहीं इस नई रिसर्च के हिसाब से प्राचीन तुर्की में मरेटन देवी की पूजा भी होती थी।
Author: kesarianews
शैलेन्द्र मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार एवं फाउंडर – केसरिया न्यूज़। राजनीति, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, निर्भीक और ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

